जम्मू और कश्मीर

उमर बोले- सरकार की आलोचना देशद्रोह नहीं

Kavita2
8 Aug 2026 9:50 AM IST
उमर बोले- सरकार की आलोचना देशद्रोह नहीं
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जेनरेशन Z यानी Gen Z की शिकायतें जायज हैं और किसी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन करने से वे देश-विरोधी नहीं हो जाते। उमर ने कहा कि सरकार की आलोचना और देश के खिलाफ गतिविधि के बीच अंतर को समझना जरूरी है।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नई दिल्ली में NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने सरकार के फैसलों और व्यवस्था की आलोचना की थी, न कि देश के खिलाफ कोई अभियान चलाया था। उनके मुताबिक लोकतंत्र में सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना और अपनी मांगों के लिए विरोध करना नागरिकों का अधिकार है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने सरकार की आलोचना की थी, लेकिन उन्होंने देश के खिलाफ कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक बात है कि मोहन भागवत ने सरकार का विरोध करने और देश के खिलाफ काम करने के बीच अंतर को स्पष्ट किया है।

सरकार की आलोचना को देश विरोध से न जोड़ें

उमर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार और देश एक-दूसरे के पर्याय नहीं हैं। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन देश और उसकी संस्थाएं स्थायी होती हैं। ऐसे में किसी सरकार की नीतियों या फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने को देश के खिलाफ कार्रवाई के रूप में देखना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक युवाओं के भीतर यदि किसी व्यवस्था को लेकर असंतोष है तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। खासकर छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकारों को संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए, क्योंकि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े फैसलों का सीधा असर लाखों युवाओं के भविष्य पर पड़ता है।

उमर ने कहा कि यदि छात्रों को किसी परीक्षा में गड़बड़ी या अनियमितता का संदेह है तो उन्हें सवाल उठाने और जवाब मांगने का अधिकार है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनकी शिकायतों की जांच करे और यदि कोई कमी सामने आती है तो उसे दूर करे।

NEET विवाद का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में नई दिल्ली में NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों का उद्देश्य देश को नुकसान पहुंचाना नहीं था। वे परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े कथित विवादों को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे थे।

NEET देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है और इसमें लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवाल सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य से जुड़े होते हैं। ऐसे में किसी भी कथित अनियमितता को लेकर छात्रों की चिंता को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।

उमर के अनुसार, छात्रों की शिकायतों को सुनने और उनके सवालों का जवाब देने के बजाय यदि हर विरोध को देश-विरोधी गतिविधि के तौर पर देखा जाएगा तो इससे लोकतांत्रिक संवाद कमजोर होगा।

मोहन भागवत के बयान को बताया अहम

RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान का उल्लेख करते हुए उमर ने कहा कि यह अच्छी बात है कि उन्होंने सरकार का विरोध करने और देश के खिलाफ काम करने के बीच अंतर बताया। उनके मुताबिक लोकतंत्र में असहमति की जगह बनी रहनी चाहिए।

उमर ने कहा कि किसी सरकार की आलोचना करने वाला व्यक्ति जरूरी नहीं कि देश का विरोध कर रहा हो। कई बार नागरिक सरकार से बेहतर नीतियों और जवाबदेही की मांग करते हैं। विरोध का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार लाना भी हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के फैसलों की आलोचना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। जब नागरिक अपनी समस्याएं सामने रखते हैं तो सरकारों को उन्हें सुनना चाहिए और उचित समाधान तलाशना चाहिए।

Gen Z की शिकायतों पर चर्चा

मोहन भागवत के बयान में Gen Z की शिकायतों को जायज बताए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हुई है। Gen Z के तहत आम तौर पर युवा पीढ़ी को संदर्भित किया जाता है, जो डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हुई है।

युवा पीढ़ी शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर तेजी से अपनी आवाज उठा रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने युवाओं को अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखने का बड़ा माध्यम दिया है।

उमर अब्दुल्ला ने संकेत दिया कि युवाओं की शिकायतों को केवल विरोध के रूप में देखने के बजाय उनके पीछे मौजूद वास्तविक समस्याओं को समझना चाहिए। यदि युवाओं को किसी परीक्षा, रोजगार या सरकारी व्यवस्था को लेकर शिकायत है तो उस पर संवाद और समाधान की प्रक्रिया होनी चाहिए।

असहमति लोकतंत्र का हिस्सा

मुख्यमंत्री के बयान में लोकतांत्रिक असहमति के महत्व पर भी जोर दिखाई दिया। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नागरिकों को अपनी बात रखने, शांतिपूर्ण विरोध करने और सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है।

उमर ने कहा कि सरकार की आलोचना करने और देश के खिलाफ काम करने के बीच स्पष्ट अंतर है। सरकार के खिलाफ आवाज उठाने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति देश के खिलाफ है। उन्होंने मोहन भागवत के बयान को इसी अंतर को स्पष्ट करने वाला बताया।

राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण

उमर अब्दुल्ला का यह बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल लंबे समय से सरकार की आलोचना को देश-विरोधी बताने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में RSS प्रमुख के बयान का स्वागत करते हुए उमर ने सरकार और देश के बीच अंतर की बात को प्रमुखता से सामने रखा है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लोकतंत्र में सरकारों को आलोचना सुनने की क्षमता रखनी चाहिए। जनता और खासकर युवाओं के सवालों का जवाब देना शासन व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

फिलहाल Gen Z की शिकायतों, छात्रों के विरोध और सरकार की आलोचना को लेकर जारी बहस के बीच उमर अब्दुल्ला का बयान इस बात पर केंद्रित है कि लोकतंत्र में असहमति को देश-विरोध के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने मोहन भागवत के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार की आलोचना और देश के खिलाफ काम करने के बीच अंतर समझना लोकतांत्रिक संवाद के लिए जरूरी है।

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