जम्मू और कश्मीर

Omar Abdullah का बयान चर्चा में, नतीजों को बताया ‘राजनीतिक भूकंप’

Kavita2
4 May 2026 1:24 PM IST
Omar Abdullah का बयान चर्चा में, नतीजों को बताया ‘राजनीतिक भूकंप’
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Srinagar श्रीनगर : पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में जारी विधानसभा चुनावों की मतगणना के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चल रही काउंटिंग के दौरान आए शुरुआती रुझानों पर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी।

सोमवार सुबह करीब 11 बजे उमर अब्दुल्ला ने एक पोस्ट में अनौपचारिक ब्रिटिश अभिव्यक्ति का उपयोग करते हुए “ब्लडी हेल” लिखा और साथ में एक शॉक इमोटिकॉन भी साझा किया। उनका यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया।

इसके कुछ समय बाद उन्होंने एक और पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावी रुझानों को “राजनीतिक भूकंप” बताया। उन्होंने लिखा कि इन नतीजों का असर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा, संभव है कि इसका प्रभाव 2029 तक देखने को मिले।

उमर अब्दुल्ला की यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब कई राज्यों में मतगणना के शुरुआती रुझानों में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहे थे। विभिन्न राज्यों में सत्ता समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं, जिससे राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान हैं।

ताजा रुझानों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) 199 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो पार्टी के लिए एक बड़ा और अप्रत्याशित प्रदर्शन माना जा रहा है। लंबे समय से यह राज्य BJP के लिए कठिन राजनीतिक क्षेत्र माना जाता रहा है।

वहीं तमिलनाडु में भी चुनावी मुकाबला बेहद रोचक नजर आ रहा है। विजय की पार्टी TVK ने अपने पहले ही चुनाव में 106 सीटों पर बढ़त हासिल कर सभी को चौंका दिया है। यह प्रदर्शन राज्य की राजनीति में एक नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, सत्ताधारी DMK 56 सीटों पर आगे चल रही है, लेकिन रुझानों में वह तीसरे स्थान पर दिखाई दे रही है, जो राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

इन रुझानों और उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कई राजनीतिक विश्लेषक इन परिणामों को आने वाले वर्षों की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देख रहे हैं।

फिलहाल सभी की नजरें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि ये शुरुआती रुझान कितने बड़े राजनीतिक बदलाव में बदलते हैं।

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