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उमर अब्दुल्ला ने रामबन में हाईवे की स्थिति का लिया जायजा

रामबन। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को उधमपुर-रामबन इलाके में पिछले सप्ताह हुई भारी बारिश के कारण भूस्खलन से प्रभावित राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति का जायजा लिया। जम्मू से श्रीनगर जाते समय मुख्यमंत्री रामबन जिले के पीरा पहुंचे और मौके पर हाईवे पर यातायात की स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से सड़क की मौजूदा स्थिति और यातायात व्यवस्था की जानकारी ली।
पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार इस समय चल रहे फल सीजन को लेकर विशेष रूप से सतर्क है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के किसानों और बागवानों की उपज समय पर बाजारों तक पहुंचना बेहद जरूरी है। हाईवे पर किसी भी तरह की बाधा से फल लदे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर किसानों और व्यापारियों पर पड़ सकता है।
भूस्खलन से प्रभावित हुआ हाईवे
पिछले सप्ताह उधमपुर और रामबन जिलों में हुई भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने से सड़क यातायात प्रभावित हुआ था। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण चट्टानों और मिट्टी के खिसकने से हाईवे के कुछ हिस्सों पर आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई थी।
राष्ट्रीय राजमार्ग-44 जम्मू-कश्मीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण सड़क संपर्क मार्ग है। यह जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ता है और रोजाना बड़ी संख्या में यात्री, मालवाहक वाहन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में हाईवे पर किसी भी तरह की रुकावट का व्यापक असर पड़ता है।
बारिश के मौसम में इस मार्ग पर भूस्खलन की घटनाएं यातायात के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं। कई बार सड़क पर मलबा आने के कारण वाहनों को रोकना पड़ता है या एक तरफ से नियंत्रित यातायात चलाना पड़ता है। इससे लंबे जाम की स्थिति भी बन सकती है।
फल सीजन पर सरकार की नजर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार मौजूदा फल सीजन को ध्यान में रखते हुए हाईवे की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में बागवानी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और इस समय बड़ी मात्रा में फल घाटी से देश के अन्य हिस्सों में भेजे जा रहे हैं।
सेब और अन्य फलों की ढुलाई के लिए समय पर परिवहन बेहद जरूरी है। यदि फल लदे ट्रक लंबे समय तक हाईवे पर फंसे रहते हैं तो इससे उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। फल जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज हैं, इसलिए बाजार तक पहुंचने में होने वाली देरी किसानों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
मुख्यमंत्री ने इसी वजह से यातायात व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासन का प्रयास रहेगा कि हाईवे पर यातायात बाधित होने की स्थिति में जल्द से जल्द रास्ता बहाल किया जाए और फल लदे वाहनों की आवाजाही में अनावश्यक देरी न हो।
किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाना चुनौती
जम्मू-कश्मीर के हजारों किसान और बागवान अपनी उपज को देश के विभिन्न हिस्सों की मंडियों तक पहुंचाने के लिए सड़क मार्ग पर निर्भर हैं। खासकर कश्मीर घाटी से निकलने वाले फलों की बड़ी खेप राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के जरिए जम्मू और आगे देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचती है।
ऐसे में हाईवे की स्थिति सीधे तौर पर किसानों की आय और फल व्यापार से जुड़ी हुई है। सड़क बंद होने या यातायात लंबे समय तक बाधित रहने पर ट्रकों की कतार लग जाती है। इससे परिवहन लागत बढ़ने के साथ फल खराब होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होने के बावजूद किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाने में कम से कम परेशानी हो।
अधिकारियों से ली स्थिति की जानकारी
रामबन के पीरा में मुख्यमंत्री ने हाईवे की स्थिति का जायजा लेने के दौरान संबंधित अधिकारियों से भी जानकारी ली। उन्होंने सड़क पर यातायात की स्थिति, भूस्खलन से हुए नुकसान और बहाली के कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क की बहाली के लिए मलबा हटाने के साथ-साथ संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी जरूरी होते हैं। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने चुनौती यह रहती है कि सड़क को यातायात के लिए जल्द से जल्द खोला जाए और साथ ही यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
मौसम को लेकर सतर्कता जरूरी
बारिश के मौसम में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात संचालन हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है। लगातार बारिश होने पर नए भूस्खलन की आशंका बनी रहती है। ऐसे में प्रशासन को मौसम के पूर्वानुमान, सड़क की स्थिति और पहाड़ी इलाकों में होने वाली गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखनी पड़ती है।
मुख्यमंत्री के निरीक्षण को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईवे की स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेने से प्रशासन को जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने और आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलती है।
फल व्यापार के लिए अहम है NH-44
राष्ट्रीय राजमार्ग-44 केवल यात्री यातायात के लिए ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। कश्मीर घाटी से निकलने वाले फल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद इसी मार्ग से देश के बड़े बाजारों तक पहुंचते हैं।
फल सीजन के दौरान हाईवे पर ट्रकों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क पर भूस्खलन या अन्य प्राकृतिक बाधाओं के कारण यातायात प्रभावित होने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सरकार के सामने इस समय दोहरी चुनौती है—एक ओर बारिश और भूस्खलन से हाईवे को सुरक्षित बनाए रखना और दूसरी ओर किसानों की उपज को समय पर बाजार तक पहुंचाना। उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि सरकार इस पूरे मुद्दे पर नजर बनाए हुए है।
यातायात सुचारु रखना सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री के निरीक्षण से यह संकेत मिला है कि प्रशासन फल सीजन के दौरान हाईवे पर यातायात को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। प्राकृतिक आपदा के कारण आने वाली बाधाओं के बीच सड़क को अधिकतम समय तक चालू रखना और जरूरत पड़ने पर तुरंत बहाली कार्य शुरू करना महत्वपूर्ण होगा।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचने में किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होने देना चाहती। हाईवे की स्थिति पर नजर रखने और यातायात को सुचारु बनाए रखने की कोशिश इसी दिशा में की जा रही है।
फिलहाल रामबन और उधमपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम और सड़क की स्थिति पर प्रशासन की निगाह बनी हुई है। फल सीजन को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-44 की निर्बाध आवाजाही जम्मू-कश्मीर के किसानों, बागवानों और फल व्यापारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है।





