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उमर अब्दुल्ला बोले- विरोध देशद्रोह नहीं, छात्रों पर कार्रवाई रोकें

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि किसी भी सरकार के खिलाफ किया गया विरोध प्रदर्शन देश के खिलाफ नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई को रोक दिया जाए।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि छात्रों ने अपने अधिकारों और उन मांगों को लेकर आवाज उठाई थी, जिन्हें वे जायज मानते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन सरकार के फैसलों के खिलाफ था, लेकिन इसे देश विरोधी गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, "उन्होंने अपने अधिकारों और जो चीजें वास्तव में उनकी थीं, उनके लिए विरोध किया, क्योंकि उनकी कोई भी मांग देश के खिलाफ नहीं थी। उनका विरोध निश्चित रूप से सरकार के खिलाफ था, लेकिन देश के खिलाफ नहीं।"
उमर अब्दुल्ला की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में युवाओं के आंदोलनों और सरकार की नीतियों को लेकर बहस जारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी चिंताओं और समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने का अधिकार है।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक बात है कि सरकार की आलोचना और देश के खिलाफ गतिविधियों के बीच अंतर को समझा जा रहा है।
मोहन भागवत ने हाल ही में Gen Z युवाओं के समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि युवाओं की कई शिकायतें जायज हैं और उनके इरादों पर भरोसा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि युवाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन करने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें राष्ट्र विरोधी माना जाए।
उमर अब्दुल्ला ने इसी संदर्भ में कहा कि लोकतंत्र में असहमति की जगह होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारों को आलोचना और विरोध को सुनने की क्षमता रखनी चाहिए, क्योंकि इससे व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
NEET परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। छात्रों और कुछ संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए थे। प्रदर्शनकारियों ने मामले की जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की थी।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि छात्रों की चिंताओं को समझने की जरूरत है और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान तलाशना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि विरोध में शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनके मुद्दों पर चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और बातचीत के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश और सरकार को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन देश स्थायी होता है। इसलिए सरकार के किसी फैसले या नीति का विरोध करना देश के खिलाफ होना नहीं है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में उमर अब्दुल्ला के इस बयान को लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं के आंदोलनों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच, NEET से जुड़े मुद्दों पर छात्रों की चिंताएं और जांच की मांग अभी भी चर्चा में हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है ताकि उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिल सके।
उमर अब्दुल्ला ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति नागरिक अधिकारों का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को देश विरोधी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए और सरकार को जनता की आवाज सुननी चाहिए।





