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बारिश और बाढ़ के हालात के बीच उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर लौटे

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को अपना दिल्ली दौरा बीच में ही समाप्त कर दिया और केंद्र शासित प्रदेश के कुछ हिस्सों में बने बारिश और बाढ़ जैसे हालात की निगरानी के लिए वापस लौट आए। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद अब नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) की ओर से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की अगुवाई पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला करेंगे।
जानकारी के अनुसार, उमर अब्दुल्ला शनिवार को राजधानी दिल्ली पहुंचे थे, जहां वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के साथ जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे। इस प्रदर्शन को पार्टी ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए अपने अभियान की शुरुआत बताया था।
नेशनल कॉन्फ्रेंस लंबे समय से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठा रही है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए राज्य का दर्जा वापस दिया जाना जरूरी है।
हालांकि, जम्मू डिवीजन के कई हिस्सों में भारी बारिश और अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बनने के बाद मुख्यमंत्री ने दिल्ली दौरा समाप्त करने का फैसला किया। अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक तैयारियों और राहत कार्यों की निगरानी के लिए वापस लौटना उचित समझा, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव, सड़क संपर्क प्रभावित होने और अन्य चुनौतियों की स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से हालात पर लगातार नजर रखने और संबंधित विभागों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
उमर अब्दुल्ला के वापस लौटने के बाद पार्टी ने निर्णय लिया कि जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व अब नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला करेंगे। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के लोगों की राजनीतिक और प्रशासनिक आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का दर्जा बहाल करना जरूरी है। पार्टी का कहना है कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने के बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित किया गया था। इसके बाद से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से उठाई जाती रही है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सत्ता में आने के बाद भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। पार्टी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर की पहचान और प्रशासनिक अधिकारों की बहाली के लिए राज्य का दर्जा वापस मिलना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उमर अब्दुल्ला का अचानक जम्मू-कश्मीर लौटना यह दर्शाता है कि सरकार के लिए वर्तमान में प्रशासनिक चुनौतियां प्राथमिकता हैं। प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में मुख्यमंत्री की मौजूदगी राहत और बचाव कार्यों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
वहीं, फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में होने वाले विरोध प्रदर्शन को पार्टी अपने राजनीतिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाएगी। इस प्रदर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की संभावना है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई जाएगी। पार्टी केंद्र सरकार से इस दिशा में जल्द कदम उठाने की अपील करती रही है।
फिलहाल जम्मू-कश्मीर प्रशासन का ध्यान बारिश और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और स्थिति नियंत्रण पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा कर सकते हैं और प्रभावित इलाकों के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकते हैं।
इस बीच, राज्य का दर्जा बहाली को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस का राजनीतिक अभियान भी जारी रहेगा, जिसकी कमान अब पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला संभालेंगे।





