जम्मू और कश्मीर

उमर अब्दुल्ला ने याद किया हमलावर खबरदार का नारा

Ratna Netam
15 Aug 2026 2:45 PM IST
उमर अब्दुल्ला ने याद किया हमलावर खबरदार का नारा
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा बयान दिया। श्रीनगर में आयोजित मुख्य समारोह में तिरंगा फहराने के बाद उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार की वर्तमान परिस्थितियों को देखकर लगता है कि करीब 80 वर्ष पहले देश के नेताओं ने जो फैसला किया था, वह सही था। उन्होंने वर्ष 1947 में हमलावरों के खिलाफ खड़े हुए लोगों के साहस और बलिदान को भी याद किया।
उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर दर्द, अफसोस और गहरी तकलीफ होती है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब वहां पाकिस्तान के सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन होने की खबरें सामने आई हैं। इन प्रदर्शनों में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की भी रिपोर्ट है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार के मौजूदा हालात देखकर उन्हें विश्वास होता है कि करीब आठ दशक पहले भारतीय नेताओं की ओर से लिया गया निर्णय सही था। उस समय जिन लोगों ने हमलावर खबरदार हम कश्मीरी हैं तैयार का नारा लगाया था, वे भी सही थे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की रक्षा के लिए उस दौर में लोगों द्वारा दिए गए बलिदान पूरी तरह उचित थे।
उनका यह बयान वर्ष 1947 में जम्मू-कश्मीर पर हुए पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले से जुड़ा है। हमले के बाद क्षेत्र में बड़े स्तर पर संघर्ष शुरू हो गया था। उस दौरान जम्मू-कश्मीर के लोगों ने हमलावरों के खिलाफ लामबंद होकर प्रतिरोध किया था। उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस पर इसी ऐतिहासिक संघर्ष और लोगों के योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोगों को लेकर भारत की स्थिति भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा के दूसरी तरफ रहने वाले लोगों को भारत अपना मानता है। वे न तो अजनबी हैं और न ही बाहरी। वह क्षेत्र जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है और वहां रहने वाले लोगों से भावनात्मक तथा ऐतिहासिक संबंध हैं।
उमर अब्दुल्ला ने वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर में हुए संवैधानिक बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर उस समय परिस्थितियां नहीं बदली होतीं तो संभव है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में रहने वाले लोग आज भारत के साथ दोबारा जुड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे होते। पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया था। इसके बाद राज्य का पुनर्गठन करके जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।
मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों के लिए आरक्षित सीटों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भी वहां रहने वाले लोगों के लिए विधानसभा में सीटें निर्धारित हैं। उन्हें उम्मीद है कि किसी दिन उस क्षेत्र के प्रतिनिधि इन खाली सीटों पर आकर उनका उपयोग कर सकेंगे।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व के लिए 24 सीटें निर्धारित हैं। वर्तमान परिस्थितियों में इन सीटों पर चुनाव नहीं होता और इन्हें खाली रखा जाता है। वर्ष 2022 में हुए परिसीमन के बाद भी इन 24 सीटों को अलग रखा गया। वर्तमान जम्मू-कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों पर चुनाव कराया जाता है, जबकि PoJK के लिए निर्धारित सीटें इससे अलग हैं। यह व्यवस्था क्षेत्र पर भारत के संवैधानिक और राजनीतिक दावे को दर्शाती है।
उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में लोकतंत्र और संघवाद को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की हर कीमत पर रक्षा करना और प्रत्येक परिस्थिति में उसे मजबूत बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही संघीय व्यवस्था की रक्षा भी आवश्यक है। उन्होंने लोगों से देश की एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत करने में योगदान देने की अपील की।
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