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- राजभवन बनाम सरकार पर...

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराए गए और जनता ने अपनी सरकार चुनी, तो फिर फैसले राजभवन से क्यों लिए जा रहे हैं।
हजरतबल में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार ने खुद जम्मू-कश्मीर को लेकर तीन चरणों की प्रक्रिया बताई थी, जिसमें पहले परिसीमन, फिर चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करना शामिल था। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चुनाव भी हो गए हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य का दर्जा वापस नहीं दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेकर अपना जनादेश दिया है। ऐसे में अब राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर जनता की जीत को सजा क्यों दी जा रही है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा, "अगर सब कुछ राजभवन से ही चलाना है तो फिर चुनाव कराने की जरूरत क्या थी?" उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार को अधिकार मिलना चाहिए और जनता के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अनुच्छेद 370 से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से बताए गए रोडमैप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने परिसीमन, चुनाव और राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही थी। अब जब पहले दो चरण पूरे हो चुके हैं, तो तीसरे चरण को पूरा करने में देरी क्यों की जा रही है।
इस दौरान उमर अब्दुल्ला ने परिसीमन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन का उद्देश्य एक विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को पहले से आशंका थी कि परिसीमन में बदलाव किए जाएंगे, लेकिन इसके बावजूद जम्मू-कश्मीर की जनता ने भाजपा और उसके सहयोगियों को नकार दिया।
उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया कि जनता विकास और लोकतांत्रिक अधिकारों को प्राथमिकता देती है। उमर ने दावा किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को जनता का समर्थन मिला है और अब चुनी हुई सरकार को पूरी शक्तियां मिलनी चाहिए।
राज्य दर्जे की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आंदोलन की तैयारी भी शुरू कर दी है। पार्टी की ओर से 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन करने का ऐलान किया गया है। इस प्रदर्शन के जरिए केंद्र सरकार पर राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने का दबाव बनाने की कोशिश की जाएगी।
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने के साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था। इसके बाद से ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग लगातार उठती रही है।
उमर अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय आया है, जब जम्मू-कश्मीर में चुनी हुई सरकार और केंद्र के बीच अधिकारों को लेकर बहस जारी है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार राज्य दर्जे की बहाली को लेकर क्या कदम उठाती है।





