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उमर अब्दुल्ला का केंद्र पर हमला, बोले लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा

जम्मू-कश्मीर: पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में जम्मू-कश्मीर के प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने आए लोगों की आवाज दबाई जा रही है और यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोग अपने अधिकारों की मांग करने देश की राजधानी पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जम्मू-कश्मीर से आए लोगों के प्रदर्शन को लेकर उमर अब्दुल्ला ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य केवल अपनी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से लगभग 100 लोग अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुंचे थे। वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना चाहते थे और केंद्र सरकार से अपने अधिकारों की मांग करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार होता है, लेकिन यहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति भी नहीं दी जा रही है।
उन्होंने कहा, "हम अपनी राष्ट्रीय राजधानी में अपने अधिकारों की मांग करने आए हैं। हम उम्मीद कर रहे थे कि हमें जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने दिया जाएगा, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ।" उमर ने आरोप लगाया कि सरकार लोगों की आवाज सुनने की बजाय उसे दबाने की कोशिश कर रही है।
उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने केंद्र सरकार को संसद और सुप्रीम कोर्ट में किए गए वादे की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पहले वादा किया था कि चुनावों के बाद जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी जम्मू-कश्मीर में जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही थी। उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि अगर सरकार राज्य का दर्जा वापस नहीं देना चाहती तो उसे खुलकर यह बात जनता के सामने रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह साफ करना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा मिलेगा या नहीं। अगर केंद्र सरकार ऐसा नहीं करना चाहती है तो उसे स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति बतानी चाहिए, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर के लोग आगे की रणनीति तय करेंगे।
नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने यह भी कहा कि यह प्रदर्शन किसी भी तरह से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाला नहीं था। प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपनी मांगों को लेकर आए थे। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आवाज को दबाना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
उमर अब्दुल्ला के बयान के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्य के दर्जे की मांग को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करते रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर समय-समय पर अलग-अलग बयान दिए जाते रहे हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति और राज्य के दर्जे के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। उमर अब्दुल्ला का कहना है कि लोकतंत्र में जनता को अपनी मांग रखने का अधिकार मिलना चाहिए और सरकार को लोगों की आवाज सुननी चाहिए। वहीं अब सभी की नजर केंद्र सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर है।





