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जम्मू और कश्मीर
रोहिंग्या मामले में नया मोड़ 101 घटनाओं ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता
nidhi
18 Sept 2026 6:49 AM IST

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रोहिंग्या विवाद
जम्मू : जम्मू में रोहिंग्या बस्तियों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से कुछ इलाकों में अवैध रूप से बने अस्थायी ढांचों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है। नारवाल समेत कुछ क्षेत्रों में जमीन मालिकों को नोटिस दिए जाने के बाद कई परिवारों ने अपनी झोपड़ियां और अस्थायी निर्माण हटाना शुरू कर दिया।
म्यांमार से शुरू हुआ पलायन
रोहिंग्या समुदाय मूल रूप से म्यांमार के रखाइन प्रांत से जुड़ा है। वहां लंबे समय से नागरिकता, सुरक्षा और हिंसा से जुड़े विवादों के कारण बड़ी संख्या में लोग पड़ोसी देशों की ओर पलायन करते रहे हैं। वर्ष 2017 के बाद म्यांमार में सैन्य कार्रवाई और हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोगों ने बांग्लादेश समेत अन्य देशों में शरण ली। भारत में भी कुछ रोहिंग्या परिवार अलग-अलग रास्तों से पहुंचे। जम्मू में इनके बसने की प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी, जहां कई परिवारों ने अस्थायी बस्तियां बनाकर रहना शुरू किया।
जम्मू में कितने रोहिंग्या हैं?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में करीब 7,656 रोहिंग्या लोगों की पहचान की गई है। इनमें जम्मू क्षेत्र के 10 जिलों में 6,737 और कश्मीर घाटी में 919 लोग शामिल बताए गए हैं। प्रशासन की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों में जम्मू क्षेत्र में विदेशी नागरिकों से जुड़े 101 मामलों का भी जिक्र किया गया है, जिनमें 179 पुरुष और 21 महिलाएं शामिल हैं।
अब क्यों हटाए जा रहे हैं?
जम्मू प्रशासन का कहना है कि कई जगहों पर बिना अनुमति बनी बस्तियों और जमीन के इस्तेमाल को लेकर कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने कुछ जमीन मालिकों को नोटिस जारी कर अस्थायी निर्माण हटाने को कहा, जिसके बाद नारवाल इलाके में कई परिवारों ने अपने ढांचे हटाने शुरू कर दिए। प्रशासनिक स्तर पर रोहिंग्या बस्तियों को लेकर जनसांख्यिकी बदलाव, जमीन के उपयोग और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की समीक्षा भी की जा रही है। एक उच्च स्तरीय समिति ने जम्मू के कुछ इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था।
सुरक्षा को लेकर उठते सवाल
जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर सत्यापन अभियान चलाती रही हैं। कुछ संगठनों और राजनीतिक दलों ने रोहिंग्या बस्तियों को लेकर सुरक्षा चिंताएं जताई हैं, जबकि रोहिंग्या परिवारों का कहना है कि वे अपने मूल देश में असुरक्षित हालात के कारण लौटने में असमर्थ हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल जम्मू में रोहिंग्या परिवारों के पुनर्वास, दस्तावेजों की जांच और कानूनी स्थिति को लेकर प्रक्रिया जारी है। प्रशासन की कार्रवाई के बीच यह सवाल भी बना हुआ है कि हटाए गए परिवार कहां जाएंगे और उनके भविष्य को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे।
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