जम्मू और कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में नई कैबिनेट सक्रिय, दरबार मूव और विकास कार्यों की समीक्षा

nidhi
28 Oct 2026 10:10 AM IST
जम्मू-कश्मीर में नई कैबिनेट सक्रिय, दरबार मूव और विकास कार्यों की समीक्षा
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मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उमर अब्दुल्ला ने की बैठक
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल विस्तार के कुछ घंटों बाद मंगलवार, 27 अक्टूबर को श्रीनगर में मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता की। नागरिक सचिवालय में हुई बैठक में विकास संबंधी प्रस्तावों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर विचार किया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में संतुलित और समान विकास को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण प्रस्ताव चर्चा के लिए रखे गए। दरबार मूव के तहत सरकारी कार्यालयों के जम्मू स्थानांतरण की तैयारियां भी बैठक की पृष्ठभूमि में प्रमुख विषय रहीं। डेली एक्सेलसियर की रिपोर्ट के अनुसार, विस्तारित मंत्रिपरिषद की इस पहली बैठक में चार नए मंत्रियों सहित सभी आठ मंत्री शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने विभिन्न प्रशासनिक मुद्दों पर मंत्रियों को जानकारी दी। हालांकि, बैठक में विचार किए गए प्रत्येक प्रस्ताव और उसके संबंध में अंतिम निर्णय का विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए चर्चा में आए विषयों और लागू हो चुके सरकारी आदेशों के बीच अंतर रखना जरूरी है।
चार नए मंत्रियों ने संभाली जिम्मेदारी
मंगलवार सुबह उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार विधायकों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी उर्फ अल्ताफ कल्लू शामिल हैं। शपथ ग्रहण समारोह श्रीनगर के लोक भवन में आयोजित हुआ। इसके बाद नए मंत्री मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली बैठक में शामिल हुए। फेरबदल में छंब से निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिपरिषद से बाहर किया गया। चार सदस्यों के शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की संख्या नौ हो गई है। पहले सरकार में मुख्यमंत्री समेत छह सदस्य थे। नई टीम बनने के साथ विभागीय जिम्मेदारियों और प्रशासनिक समन्वय का महत्व बढ़ गया है। बैठक के समय प्रकाशित रिपोर्टों में नए विभागों के अंतिम आवंटन की घोषणा का इंतजार बताया गया था।
विकास प्रस्तावों और वित्तीय प्राथमिकताओं पर विचार
मुख्यमंत्री कार्यालय ने बैठक में संतुलित विकास से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किए जाने की जानकारी दी। इसका व्यापक संदर्भ जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर प्रशासनिक कामकाज आगे बढ़ाना है। किसी विशेष परियोजना का नाम, स्वीकृत लागत या क्रियान्वयन की समयसीमा बताए बिना नई योजना लागू होने का दावा नहीं किया जा सकता। डेली एक्सेलसियर ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मुख्यमंत्री ने मौजूदा वित्त वर्ष के संशोधित बजट प्रस्तावों और प्रशासनिक स्थिति पर मंत्रियों को जानकारी दी। रिपोर्ट में उद्योग एवं वाणिज्य, आवास एवं शहरी विकास तथा ग्रामीण विकास से संबंधित कुछ प्रस्तावों पर सहमति का उल्लेख भी है। हालांकि, इनका पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं है। औपचारिक आदेश आने पर संबंधित फैसलों का दायरा स्पष्ट होगा।
दरबार मूव के तहत जम्मू जाएंगी सरकारी व्यवस्थाएं
सर्दियों के लिए सरकारी कार्यालयों को श्रीनगर से जम्मू स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी इस समय महत्वपूर्ण है। दरबार मूव के तहत कार्यालयों, कर्मचारियों और आवश्यक व्यवस्थाओं का स्थानांतरण किया जाता है। पहले जारी तैयारियों के मुताबिक, जम्मू में नागरिक सचिवालय दो नवंबर को खुलना निर्धारित है। कर्मचारियों और सरकारी सामान की आवाजाही के लिए 31 अक्टूबर तथा एक नवंबर का कार्यक्रम बताया गया है। यह कार्यक्रम 27 अक्टूबर की बैठक में पहली बार घोषित नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने 13 अक्टूबर की अलग उच्चस्तरीय समीक्षा में भी इसकी तैयारियां देखी थीं। उस समय परिवहन, मार्ग सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और कर्मचारियों के आवास जैसे विषयों पर निर्देश दिए गए थे। वर्तमान बैठक को इन पहले से चल रही तैयारियों की प्रशासनिक पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए।
श्रीनगर में शीतकालीन सचिवालय की व्यवस्था
दरबार मूव के बाद भी श्रीनगर में शीतकालीन सचिवालय के संचालन की व्यवस्था की गई है। पहले की समीक्षा संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रियों और प्रशासनिक सचिवों की वहां मौजूदगी के लिए मासिक रोस्टर तैयार किया जाना है। इसका उद्देश्य कार्यालयों के जम्मू स्थानांतरित होने के दौरान भी कश्मीर में प्रशासनिक संपर्क बनाए रखना है। सचिवालय के स्थानांतरण में अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय आवश्यक होता है। कर्मचारी परिवहन से लेकर जरूरी कार्यालय सामग्री और सेवाओं की उपलब्धता तक कई व्यवस्थाएं जुड़ी रहती हैं। इसलिए दरबार मूव केवल कार्यालय खोलने की तारीख तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। संबंधित विभागों की तैयारी और निर्धारित कार्यक्रम का पालन भी इसके सुचारु संचालन के लिए जरूरी होगा।
बर्फबारी की तैयारियों पर पहले हुई थी अलग समीक्षा
बर्फबारी और सर्दियों की व्यवस्थाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने 21 अक्टूबर को अलग समीक्षा बैठक की थी। उसमें सड़कों से बर्फ हटाने, बिजली और पेयजल आपूर्ति, आवश्यक वस्तुओं के भंडारण तथा स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर चर्चा हुई थी। उपलब्ध स्रोतों से इन सभी निर्देशों को 27 अक्टूबर की मंत्रिपरिषद बैठक का नया निर्णय बताने की पुष्टि नहीं होती। उस समीक्षा में विभागों के बीच जिम्मेदारियां स्पष्ट रखने और बर्फ हटाने के काम में समन्वय पर जोर दिया गया था। मुख्यमंत्री ने निर्धारित बिजली कटौती कार्यक्रम से अतिरिक्त या अनियोजित कटौती नहीं करने के निर्देश भी दिए थे। दूरदराज क्षेत्रों में चिकित्सा सहायता और जरूरी आपूर्ति बनाए रखने की तैयारियां भी समीक्षा का हिस्सा थीं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सरकार के सामने अब नई टीम के साथ प्रशासनिक कामकाज आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। विकास प्रस्ताव, दरबार मूव और सर्दियों की तैयारियां इसकी प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। बैठक के विस्तृत आधिकारिक निर्णय और विभागीय आदेश आने पर आगे की कार्ययोजना अधिक स्पष्ट होगी।
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