- Home
- /
- राज्य
- /
- जम्मू और कश्मीर
- /
- जम्मू-कश्मीर के विशेष...

x
श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि पार्टी एक "एकजुट और ठोस दीवार" बनी हुई है, जिसने अपने राजनीतिक इतिहास में अनगिनत तूफानों का सामना किया है, कठिन परीक्षणों का सामना किया है और कई चुनौतियों पर काबू पाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की ताकत लोगों के साथ उसके "अटूट बंधन", उसकी जन-समर्थक नीतियों और संवैधानिक, लोकतांत्रिक और मौलिक अधिकारों के लिए उसके ऐतिहासिक संघर्ष में निहित है।
यहां जारी एक बयान में, अब्दुल्ला ने कहा कि एनसी अपनी विचारधारा, राजनीतिक सिद्धांतों और ऐतिहासिक मिशन के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर के लोगों से छीने गए संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए हमारा संघर्ष कल भी जारी था, आज भी जारी है और तब तक जारी रहेगा जब तक हमारे संवैधानिक अधिकारों, गरिमा और लोकतांत्रिक स्थिति को बहाल करने का उद्देश्य हासिल नहीं हो जाता।" उन्होंने कहा कि कोई भी गलत प्रचार, भ्रामक बयानबाजी या भ्रामक साजिश नेकां की ऐतिहासिक भूमिका, राजनीतिक स्थिति या सार्वजनिक एजेंडे को विकृत नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि पार्टी की राजनीति सत्ता की प्राप्ति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों, पहचान, विशिष्ट चरित्र और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की रक्षा में निहित है। अब्दुल्ला ने कहा कि एनसी ने 5 अगस्त, 2019 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, संसद में निरसन का लगातार विरोध किया और जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से रखी।
उन्होंने कहा, "चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से लोगों द्वारा पार्टी को दिए गए जनादेश के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति की बहाली की मांग करने वाला एक प्रस्ताव विधान सभा के पहले सत्र में भारी बहुमत से पारित किया गया था। यह प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक कदम नहीं था, बल्कि लोगों की भावनाओं, आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक जनादेश का प्रतिबिंब था।" उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना पार्टी के राजनीतिक संघर्ष का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा था। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा लोगों का संवैधानिक अधिकार है और पार्टी इसकी बहाली की मांग करती रहेगी। अब्दुल्ला ने कहा, पार्टी का अंतिम लक्ष्य एक ऐसा जम्मू-कश्मीर है जहां लोग अपने अधिकारों, सम्मान, राजनीतिक सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक स्वाभिमान की पूरी तरह से रक्षा के साथ रह सकें।
Next Story





