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जम्मू और कश्मीर
महिला आरक्षण पर मोदी की दृष्टि, कानून से परे: Dr Jitendra
Ratna Netam
20 April 2026 3:56 PM IST

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Jammu.जम्मू: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सामाजिक विचारक डॉ. जितेंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए महिला आरक्षण सिर्फ एक कानून या राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आस्था और सामाजिक प्रतिबद्धता का विषय है। उन्होंने यह बात हाल ही में एक विशेष सत्र में महिला सशक्तिकरण और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर आयोजित चर्चा के दौरान कही।
डॉ. जितेंद्र ने कहा कि मोदी हमेशा से महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की रक्षा के पक्षधर रहे हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को राजनीति, शिक्षा और समाज के हर क्षेत्र में बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “मोदी के लिए महिला आरक्षण एक मात्र राजनीतिक या कानूनी विषय नहीं है, यह उनके जीवन और विचारधारा की आस्था से जुड़ा है। वे मानते हैं कि महिलाओं की भागीदारी समाज और लोकतंत्र दोनों के लिए आवश्यक है।”
डॉ. जितेंद्र ने इस अवसर पर महिलाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सशक्त महिलाओं का समाज में योगदान विकास, समानता और न्याय के लिए अहम है। उन्होंने यह भी बताया कि महिला आरक्षण के समर्थन में प्रधानमंत्री के प्रयासों में केवल विधायी पहल ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और मानसिकता परिवर्तन पर भी ध्यान दिया गया है।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कानून लागू करने के पीछे न केवल संविधान की दृष्टि है, बल्कि यह एक नैतिक और आस्थागत पहल भी है, जिससे महिलाओं को अपने अधिकार और नेतृत्व क्षमता के लिए प्लेटफॉर्म मिलता है। डॉ. जितेंद्र ने बताया कि मोदी सरकार ने स्थानीय निकायों और संसद में महिला भागीदारी बढ़ाने के लिए कई पहलें की हैं, जिससे महिलाओं को राजनीति में अधिक सक्रिय और सशक्त बनाया जा सके।
डॉ. जितेंद्र ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण केवल संख्या या प्रतिशत की बात नहीं है, बल्कि यह समाज में महिलाओं के सम्मान, उनकी आवाज़ और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे महिला सशक्तिकरण के इन प्रयासों का समर्थन करें और समाज में समानता के सिद्धांत को मजबूत करें।
इस अवसर पर आयोजित चर्चा में उपस्थित अन्य नेताओं और विशेषज्ञों ने भी महिला आरक्षण और सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र और समाज के हर क्षेत्र के लिए अनिवार्य है।
डॉ. जितेंद्र का यह बयान मोदी के महिला सशक्तिकरण और समान अवसरों के प्रति दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि महिला आरक्षण केवल कानूनी मामला नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और नैतिक प्रतिबद्धता है, जिसे प्रधानमंत्री गहराई से मानते और समर्थन करते हैं।
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