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जम्मू में चमत्कार जैसा मामला, शव के साथ जा रहे थे परिजन, युवक ने किया फोन

जम्मू : जम्मू शहर में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने परिजनों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े लोगों को भी हैरान कर दिया। सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) जम्मू में एक युवक को मृत समझ लिया गया और परिवार उसका शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़ा। लेकिन श्मशान पहुंचने से पहले ही एक फोन कॉल ने पूरे घटनाक्रम को बदल दिया।
27 वर्षीय विशाल नाम के युवक के परिवार के लोग उस समय गहरे सदमे में थे। उन्हें बताया गया था कि विशाल की मौत हो गई है। इसके बाद परिवार ने शव को अस्पताल से लिया और अंतिम संस्कार की तैयारी के लिए एंबुलेंस से श्मशान की ओर रवाना हो गए।
एंबुलेंस अभी रास्ते में ही थी कि अचानक एक फोन आया। फोन उठाने पर दूसरी तरफ से आवाज आई, “मैं विशाल बोल रहा हूं... मैं जिंदा हूं। जो शव आप ले जा रहे हो, वह मेरा नहीं है।”
यह सुनकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए। कुछ पल के लिए उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि जिस व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए वे जा रहे थे, वह खुद फोन कर बता रहा है कि वह जिंदा है।
घटना के बाद एंबुलेंस को तुरंत वापस मोड़ा गया और उसे दोबारा सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू लाया गया। परिवार के लोग भी हैरान और परेशान हालत में अस्पताल पहुंचे। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में शव की पहचान को लेकर किसी तरह की गलती हुई थी। परिवार को जो शव सौंपा गया था, वह किसी अन्य व्यक्ति का था। वहीं, विशाल अस्पताल में जीवित मौजूद था।
इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शव की पहचान जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में हुई इस चूक ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सावधानी और निगरानी की जरूरत को उजागर किया है।
परिजनों के लिए यह घटना भावनात्मक रूप से बेहद झकझोर देने वाली रही। एक ओर वे अपने बेटे के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर अचानक उसके जीवित होने की खबर मिली। कुछ ही मिनटों में परिवार का दुख हैरानी और राहत में बदल गया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू कर दी। अधिकारियों की ओर से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शव की पहचान में गलती कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
अस्पतालों में शव सौंपने से पहले कई स्तरों पर पहचान की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें मरीज के रिकॉर्ड, परिजनों की पहचान और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जाता है। ऐसे में इस तरह की गलती होना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।
मामले की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह चूक किस स्तर पर हुई। अस्पताल प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही है।
स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में मरीजों और शवों की पहचान की प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि किसी परिवार को ऐसी दर्दनाक स्थिति से न गुजरना पड़े।
फिलहाल विशाल सुरक्षित है और उसके परिवार ने राहत की सांस ली है। हालांकि, इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था पर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
जम्मू की यह घटना अब चर्चा का विषय बन गई है, जहां एक गलत पहचान के कारण एक परिवार कुछ समय के लिए अपने जीवित सदस्य को खो चुका समझ बैठा था। समय रहते आए उस फोन कॉल ने न केवल एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सतर्कता की अहमियत भी सामने ला दी।





