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जम्मू और कश्मीर
फॉरेस्ट्री छात्रों के समर्थन में महबूबा मुफ्ती सरकार से की बड़ी मांग
Ratna Netam
8 Oct 2026 6:57 PM IST

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में वन विभाग की भर्ती के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को फॉरेस्ट्री के छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से भर्ती नियमों की समीक्षा करने की अपील की। बीएससी फॉरेस्ट्री के छात्र फॉरेस्टर और रेंज ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए अपनी डिग्री को उचित मान्यता देने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि संबंधित विषय में विशेष शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद प्रस्तावित भर्ती नियमों में उनकी योग्यता को अपेक्षित महत्व नहीं दिया जा रहा है। महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और समस्या का समाधान निकालने की आवश्यकता जताई।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि फॉरेस्ट्री के छात्र पिछले 17 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी मांगों पर विचार किया जाए।पीडीपी प्रमुख ने कहा कि लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे युवाओं की समस्याओं का समाधान निकालना आवश्यक है। उनका मानना है कि विशेष व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को संबंधित विभाग की भर्ती प्रक्रिया में उचित अवसर मिलना चाहिए।महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है, जब गांदरबल जिले में शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कश्मीर (SKUAST-K) के फॉरेस्ट्री संकाय के विद्यार्थी प्रस्तावित भर्ती नियमों के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं।
17 दिनों से जारी छात्रों का विरोध प्रदर्शन
गांदरबल के बेनहामा स्थित विश्वविद्यालय परिसर में फॉरेस्ट्री के छात्र प्रस्तावित भर्ती नियमों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि वन विभाग के फॉरेस्टर पद के लिए निर्धारित की जा रही शैक्षणिक योग्यताओं में बदलाव से उनकी रोजगार संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।छात्रों की प्रमुख मांग है कि फॉरेस्टर पद पर सीधी भर्ती के लिए बीएससी फॉरेस्ट्री को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता बनाया जाए। उनका तर्क है कि वन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और संबंधित तकनीकी विषयों में विशेष अध्ययन करने वाले उम्मीदवारों की योग्यता को भर्ती प्रक्रिया में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।6 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, विद्यार्थियों का प्रदर्शन लगातार 16वें दिन और भूख हड़ताल आठवें दिन में पहुंच गई थी। छात्र तब भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए थे।
भर्ती नियमों में बदलाव से छात्रों की चिंता बढ़ी
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना है कि वन विभाग में फॉरेस्टर की भर्ती के लिए प्रस्तावित नियमों से विशेष रूप से फॉरेस्ट्री की पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है।छात्रों के अनुसार, उन्होंने वन विज्ञान से संबंधित विभिन्न विषयों में व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त की है। इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत वन संसाधनों का प्रबंधन, पौधों और वृक्षों का अध्ययन, पर्यावरण संरक्षण तथा वन पारिस्थितिकी जैसे विषय शामिल होते हैं।विद्यार्थियों का कहना है कि इन विषयों में प्राप्त ज्ञान का सीधा संबंध वन विभाग के कामकाज से है। ऐसे में संबंधित पदों की भर्ती में उनकी डिग्री को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए।उन्होंने सरकार से प्रस्तावित नियमों की समीक्षा करते हुए फॉरेस्ट्री स्नातकों के लिए स्पष्ट शैक्षणिक पात्रता निर्धारित करने की मांग की है।
रेंज ऑफिसर के रिक्त पदों पर भर्ती की भी मांग
फॉरेस्ट्री के विद्यार्थियों ने केवल फॉरेस्टर पद की योग्यता का मुद्दा ही नहीं उठाया है, बल्कि रेंज ऑफिसर के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग की है।23 सितंबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 2018 से 2026 तक रिक्त पड़े रेंज ऑफिसर पदों को बिना देरी के विज्ञापित करने की मांग की थी।छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी से संबंधित विषयों में पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों को रोजगार के अवसर प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है।उन्होंने कहा कि बार-बार आंदोलन करने के बजाय वे अपनी पढ़ाई, शोध और करियर की तैयारी पर ध्यान देना चाहते हैं। इसके लिए सरकार को भर्ती नियमों और रिक्तियों से संबंधित स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
महबूबा मुफ्ती ने सरकार से हस्तक्षेप की अपील की
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी मांगों पर ध्यान देने का आग्रह किया।उन्होंने कहा कि विद्यार्थी कई दिनों से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें प्रदर्शन और भूख हड़ताल का सहारा लेना पड़ रहा है।महबूबा मुफ्ती ने भर्ती नियमों की समीक्षा करने और फॉरेस्ट्री की डिग्री को संबंधित पदों के लिए मान्यता देने की मांग पर विचार करने को कहा।उनकी अपील का मुख्य उद्देश्य छात्रों के आंदोलन से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने रखना और संबंधित अधिकारियों से समाधान की दिशा में कदम उठाने का अनुरोध करना है।
विशेष शिक्षा और रोजगार के अवसरों का सवाल
फॉरेस्ट्री के विद्यार्थियों का विरोध प्रदर्शन व्यावसायिक शिक्षा और सरकारी रोजगार के अवसरों से जुड़े व्यापक प्रश्नों को भी सामने लाता है।छात्रों का तर्क है कि जब किसी विषय में विशेष डिग्री प्रदान की जाती है, तो उस विषय से संबंधित सरकारी पदों की भर्ती में उसकी उपयोगिता का उचित मूल्यांकन होना चाहिए।हालांकि, सरकारी पदों के लिए शैक्षणिक योग्यताएं निर्धारित करना संबंधित प्रशासन और भर्ती नियम बनाने वाली संस्थाओं का अधिकार है। ऐसे निर्णयों में पद की जिम्मेदारियों, कार्य की प्रकृति और निर्धारित सेवा नियमों का ध्यान रखा जाता है।फिलहाल प्रदर्शनकारी विद्यार्थी चाहते हैं कि सरकार प्रस्तावित नियमों पर दोबारा विचार करे और उनकी डिग्री से संबंधित पात्रता की स्थिति स्पष्ट करे।
भूख हड़ताल के बीच समाधान की मांग
छात्रों के लंबे विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के कारण यह मामला चर्चा में बना हुआ है। विद्यार्थियों ने अपनी मांगें पूरी होने तक शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की बात कही है।उनका कहना है कि भर्ती नियमों को लेकर अनिश्चितता समाप्त होनी चाहिए, ताकि वे भविष्य की रोजगार परीक्षाओं और अन्य अवसरों के लिए अपनी तैयारी कर सकें।छात्रों ने संबंधित अधिकारियों से बातचीत करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।
सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर
महबूबा मुफ्ती के समर्थन के बाद फॉरेस्ट्री छात्रों का आंदोलन राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। पीडीपी प्रमुख ने सरकार से फॉरेस्टर और रेंज ऑफिसर पदों की भर्ती से संबंधित योग्यता नियमों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया हैफिलहाल भर्ती नियमों में बदलाव या प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों को स्वीकार किए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।अब छात्रों की प्रमुख मांग प्रस्तावित भर्ती नियमों में संशोधन, बीएससी फॉरेस्ट्री की योग्यता को उचित मान्यता और रेंज ऑफिसर के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की है।जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से इस विषय पर लिए जाने वाले अगले निर्णय से ही स्पष्ट होगा कि विद्यार्थियों की मांगों पर क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं।
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