जम्मू और कश्मीर

मेडिकल याचिका, HC ने मियां अब्दुल कयूम को राहत नहीं दी

Ratna Netam
10 April 2026 6:11 PM IST
मेडिकल याचिका, HC ने मियां अब्दुल कयूम को राहत नहीं दी
x
JAMMU.जम्मू: उच्च न्यायालय ने मियां अब्दुल कयूम की मेडिकल याचिका पर सुनवाई करते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। याचिका में कयूम ने अपने स्वास्थ्य की स्थिति के कारण तत्काल राहत की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि प्रस्तुत प्रमाण और मेडिकल दस्तावेज़ पर्याप्त नहीं हैं कि उन्हें विशेष राहत प्रदान की जाए।
याचिका में मियां अब्दुल कयूम ने बताया कि उनके स्वास्थ्य में गंभीर समस्या है और नियमित चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है। उन्होंने कोर्ट से अपील की कि उन्हें अस्थायी या स्थायी मेडिकल राहत दी जाए, ताकि उनके उपचार और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, कोर्ट ने इस याचिका का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया और पाया कि याचिका में प्रस्तुत प्रमाण और रिपोर्ट कोर्ट की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं।
कोर्ट ने आदेश में कहा कि किसी भी मेडिकल राहत का निर्णय तथ्यों और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर होना चाहिए। वर्तमान में प्रस्तुत रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेज़ पर्याप्त नहीं दिख रहे हैं, और इसलिए याचिका में अनुरोधित राहत प्रदान करना न्यायसंगत नहीं होगा।
मियां अब्दुल कयूम के पक्ष में प्रस्तुत वरिष्ठ अधिवक्ता ने दावा किया कि उनके मुवक्किल के स्वास्थ्य पर तत्काल खतरा है और यह जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार से संबंधित मामला है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि याचिका को गंभीरता से लेते हुए तुरंत राहत प्रदान की जाए। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि यह मामला गहन और विस्तृत चिकित्सा मूल्यांकन की मांग करता है, जिसे वर्तमान समय में अदालत के सामने प्रस्तुत प्रमाण पूरी तरह से पूरा नहीं कर रहे हैं।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि यदि मियां अब्दुल कयूम का स्वास्थ्य और अधिक बिगड़े या नया प्रमाण उपलब्ध हो, तो वे पुनः याचिका दायर कर सकते हैं। अदालत ने स्थानीय चिकित्सा अधिकारियों और संबंधित स्वास्थ्य संस्थाओं से भी सुझाव देने को कहा कि भविष्य में ऐसी याचिकाओं का त्वरित और न्यायसंगत समाधान किया जा सके।
याचिका पर सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा और देखभाल के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, लेकिन राहत देने के लिए पर्याप्त प्रमाण और विशेषज्ञ राय का होना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है कि सभी तथ्य और प्रमाणों का सही मूल्यांकन किया जाए।
मियां अब्दुल कयूम के वकील ने सुनवाई के बाद कहा कि वे न्यायालय के आदेश का सम्मान करेंगे, लेकिन आवश्यक चिकित्सा सहायता और उपचार सुनिश्चित करने के लिए अन्य विकल्प तलाशेंगे।
इस मामले ने यह भी रेखांकित किया कि मेडिकल राहत याचिकाओं में दस्तावेज़ों और विशेषज्ञ रिपोर्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना पर्याप्त प्रमाण के किसी भी प्रकार की राहत देना न्यायिक दृष्टिकोण से उचित नहीं होगा।
इस निर्णय के बाद, मियां अब्दुल कयूम के स्वास्थ्य और उनके उपचार की निगरानी परिवार और उनके चिकित्सकों द्वारा जारी रहेगी, और कोर्ट के निर्देशानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
Next Story