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बडगाम में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, मारा गया लश्कर का पाकिस्तानी आतंकी यासिर

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षाबलों को बडगाम जिले के ऊंचाई वाले इलाके में बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बलों के साथ हुए ऑपरेशन में मारे गए आतंकवादी की पहचान यासिर के रूप में हुई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक यासिर पाकिस्तान का नागरिक था और कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा हुआ था। पुलिस ने शनिवार को उसकी पहचान से संबंधित जानकारी साझा की।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए आतंकवादी की पहचान महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार मारा गया यासिर विदेशी आतंकवादी था। अब सुरक्षा एजेंसियां उससे जुड़े नेटवर्क और जम्मू-कश्मीर में उसकी गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने में लगी हैं। इसके साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह कब और किस रास्ते से क्षेत्र में पहुंचा था तथा स्थानीय स्तर पर उसे किस तरह की मदद मिल रही थी।
बडगाम जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्र में चलाए गए इस अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने आतंकवादी को मार गिराया। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में इस तरह के अभियान सुरक्षाबलों के लिए चुनौतीपूर्ण होते हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जवानों ने अभियान को अंजाम दिया।
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक मारे गए आतंकवादी की पहचान यासिर के रूप में हुई है और वह पाकिस्तान का रहने वाला था। उसके लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने की बात भी कही गई है। हालांकि उसके संगठन में पद, जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहने की अवधि और उससे जुड़े अन्य लोगों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की जांच जारी रह सकती है।
विदेशी आतंकवादियों की मौजूदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती रहती है। ऐसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ उनके स्थानीय संपर्कों और मददगारों का पता लगाना भी जांच का अहम हिस्सा होता है। यही वजह है कि किसी विदेशी आतंकवादी के मारे जाने के बाद उसके पास से मिले संभावित सुरागों और पूर्व गतिविधियों की गहराई से पड़ताल की जाती है।
सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि यासिर ने बडगाम के ऊंचाई वाले इलाके को ठिकाने के रूप में क्यों चुना था। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों का इस्तेमाल आतंकवादी कई बार सुरक्षाबलों की नजर से बचने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवाजाही के लिए करते हैं। ऐसे इलाकों में तलाशी अभियान चलाना भी अपेक्षाकृत कठिन होता है।
ऑपरेशन के बाद आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ाए जाने की संभावना है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य संदिग्ध की मौजूदगी या नेटवर्क से संबंधित जानकारी मिलती है तो उसके आधार पर आगे तलाशी अभियान चलाया जा सकता है। आतंकवाद विरोधी अभियानों में पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान आधारित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है और जम्मू-कश्मीर में उसकी गतिविधियों को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से सतर्क रही हैं। संगठन से जुड़े आतंकवादियों के खिलाफ घाटी के अलग-अलग इलाकों में समय-समय पर अभियान चलाए जाते रहे हैं। ऐसे में कथित तौर पर संगठन से जुड़े एक पाकिस्तानी आतंकवादी का मारा जाना सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
बडगाम मध्य कश्मीर का महत्वपूर्ण जिला है। इसके कई हिस्से पहाड़ी और वन क्षेत्र वाले हैं। ऐसे क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर सुरक्षाबलों को सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ता है। इलाके की भौगोलिक परिस्थितियां अभियान की अवधि और रणनीति दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।
आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में केवल मुठभेड़ में आतंकियों को मार गिराना ही लक्ष्य नहीं होता, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को तोड़ना भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से किसी आतंकवादी की पहचान होने के बाद उसके संपर्कों, ठिकानों, आवाजाही और उसे उपलब्ध कराई गई सहायता के बारे में जानकारी जुटाई जाती है। यदि यासिर के स्थानीय नेटवर्क के बारे में कोई जानकारी सामने आती है तो सुरक्षा एजेंसियां उसके आधार पर आगे कार्रवाई कर सकती हैं।
मारे गए आतंकवादी के पाकिस्तानी नागरिक होने की जानकारी सामने आने के बाद सीमा पार से आतंकवाद और घुसपैठ का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में आ सकता है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार घुसपैठ की कोशिशों और आतंकवादी गतिविधियों पर नजर बनाए रखती हैं। सीमा से लेकर अंदरूनी इलाकों तक निगरानी और खुफिया तंत्र के आधार पर आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए जाते हैं।
फिलहाल पुलिस की ओर से मारे गए आतंकवादी की पहचान यासिर के रूप में किए जाने और उसके पाकिस्तानी नागरिक होने की जानकारी दी गई है। उसके लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंधों की बात भी सामने आई है। अब जांच के जरिए उसकी गतिविधियों और संपर्कों से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाई जाएंगी।
बडगाम के ऊंचाई वाले इलाके में हुए इस ऑपरेशन के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर क्षेत्र की गतिविधियों पर बनी हुई है। आगे की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि यासिर अकेले सक्रिय था या उसके साथ अन्य आतंकवादियों अथवा मददगारों का कोई नेटवर्क भी जुड़ा हुआ था।





