जम्मू और कश्मीर

पैलेट गन पीड़िता इंशा को बड़ी राहत, सरकार देगी 41 लाख रुपये का मुआवजा

nidhi
31 July 2026 9:48 AM IST
पैलेट गन पीड़िता इंशा को बड़ी राहत, सरकार देगी 41 लाख रुपये का मुआवजा
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10 साल बाद मिला इंसाफ, इंशा की जिंदगी बदलने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार का बड़ा कदम
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन से घायल होकर अपनी आंखों की रोशनी गंवाने वाली इंशा मुश्ताक को करीब 10 साल बाद न्याय मिला है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने इंशा को 41 लाख रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया है। यह मामला साल 2016 के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है, जब पैलेट गन की चपेट में आने से इंशा की आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा था।
सरकार के इस फैसले के बाद पीड़िता और उसके परिवार ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से मुआवजे और न्याय की मांग कर रहे परिवार के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
2016 में पैलेट गन से हुई थी घायल
इंशा मुश्ताक वर्ष 2016 में उस समय घायल हुई थीं, जब सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान इस्तेमाल की गई पैलेट गन की चपेट में वह आ गई थीं। इस घटना में उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी।
इसके बाद उनका इलाज कराया गया, लेकिन आंखों की रोशनी वापस नहीं आ सकी। घटना के बाद यह मामला जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर बड़ी बहस का विषय बना था।
सरकार ने तय किया 41 लाख रुपये का मुआवजा
लंबी प्रक्रिया के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने इंशा को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से दिए जाने वाले मुआवजे का उद्देश्य पीड़िता को राहत प्रदान करना है।
यह फैसला मानवाधिकार और पुनर्वास से जुड़े मामलों में सरकार की जिम्मेदारी के तौर पर देखा जा रहा है।
परिवार ने जताई संतुष्टि
इंशा के परिवार ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन अब सरकार के कदम से उन्हें कुछ राहत मिली है।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर उठे थे सवाल
2016 के बाद जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी। मानवाधिकार संगठनों और कई लोगों ने इसके उपयोग से होने वाली गंभीर चोटों पर चिंता जताई थी।
सुरक्षा एजेंसियां इसे भीड़ नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला गैर-घातक विकल्प बताती रही हैं, जबकि आलोचकों ने इसके संभावित नुकसान पर सवाल उठाए हैं।
10 साल बाद मिला न्याय
इंशा का मामला उन लोगों में शामिल रहा, जिनकी जिंदगी पैलेट गन की घटनाओं से प्रभावित हुई। करीब एक दशक बाद मिले मुआवजे को उनके लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
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