जम्मू और कश्मीर

शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, 32 हजार छात्र प्रभावित

Saba Naaz
31 July 2026 4:14 PM IST
शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, 32 हजार छात्र प्रभावित
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल सामने आया है। प्रदेश के 1,371 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले 32,303 विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। केंद्र सरकार के नवीनतम यू-डाइस प्लस आंकड़ों के अनुसार शिक्षकों की कमी के कारण इन स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के कई सरकारी स्कूलों में एक ही शिक्षक को सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इसके अलावा उसे स्कूल के प्रशासनिक काम, रिकॉर्ड तैयार करने, मिड-डे-मील व्यवस्था की निगरानी, अभिभावकों से संपर्क और अन्य सरकारी कार्य भी करने पड़ते हैं। ऐसे में शिक्षक के लिए हर कक्षा के बच्चों को पर्याप्त समय देना मुश्किल हो जाता है।

इन स्कूलों में सबसे अधिक परेशानी प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को हो रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती कक्षाओं में बच्चों की पढ़ने, लिखने और गणित जैसी बुनियादी क्षमताओं का विकास होता है। यदि इस स्तर पर बच्चों को पर्याप्त शिक्षक और मार्गदर्शन नहीं मिलता है तो इसका असर उनके पूरे शैक्षणिक भविष्य पर पड़ सकता है।

एक शिक्षक वाले स्कूलों में अक्सर ऐसा होता है कि जब शिक्षक एक कक्षा को पढ़ा रहे होते हैं, तो दूसरी कक्षा के बच्चे बिना शिक्षक के बैठने को मजबूर होते हैं। इससे बच्चों की सीखने की गति धीमी हो जाती है और पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि भी कम होने लगती है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहने पर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

यू-डाइस प्लस आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 146 ऐसे स्कूल भी हैं जहां एक भी विद्यार्थी का नामांकन नहीं है। इन स्कूलों को लेकर भी शिक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। वहीं, जिन स्कूलों में विद्यार्थी पढ़ रहे हैं लेकिन शिक्षक नहीं हैं, वहां तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति की जरूरत महसूस की जा रही है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में स्थिति और गंभीर है। कई क्षेत्रों में मल्टीग्रेड शिक्षण व्यवस्था लागू है, जहां अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। इस व्यवस्था में शिक्षक के लिए सभी विद्यार्थियों की जरूरतों पर ध्यान देना कठिन हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेज सकते हैं, लेकिन गरीब परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूलों पर निर्भर रहते हैं। इससे शिक्षा के क्षेत्र में असमानता बढ़ने का खतरा है।

शिक्षा विशेषज्ञ राजेंद्र खजूरिया ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शिक्षक पदों को जल्द भरना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छोटे विद्यालयों का उचित पुनर्गठन और दूरदराज क्षेत्रों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति पर विशेष ध्यान देना होगा।

उन्होंने बताया कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो सिंगल शिक्षक स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों की शिक्षा गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। प्राथमिक स्तर पर कमजोर शिक्षा का असर आगे चलकर बच्चों की उच्च शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास पर भी पड़ सकता है।

जम्मू-कश्मीर में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अब सबसे बड़ी जरूरत शिक्षकों की कमी दूर करने की है। 32 हजार से ज्यादा बच्चों का भविष्य बेहतर शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर है और इसके लिए जल्द ठोस कदम उठाने की मांग उठ रही है।

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