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श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बारामुला जिले के एक प्रमुख रिश्वत मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने तत्कालीन पटवारी फिदा हुसैन शाह और पूर्व लंबरदार मंजूर अहमद मीर के खिलाफ विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। दोनों पर सरकारी कार्य से जुड़े दस्तावेज जारी करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।
एसीबी के अनुसार, यह मामला उस समय सामने आया जब शिकायतकर्ता और उसके पिता ने भवन निर्माण अनुमति के लिए जरूरी राजस्व रिकॉर्ड और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) हासिल करने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया था। आरोप है कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के बदले आरोपितों ने उनसे रिश्वत की मांग की।
जांच एजेंसी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर एसीबी ने आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई। इसके बाद विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में आरोपपत्र पेश किया गया।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्वत मांगना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो लगातार कार्रवाई कर रहा है, ताकि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बनी रहे और आम लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता को भवन निर्माण से संबंधित अनुमति प्राप्त करने के लिए राजस्व विभाग से कुछ आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत थी। इसमें राजस्व रिकॉर्ड और एनओसी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं शामिल थीं। आरोप है कि इन दस्तावेजों को जारी करने के लिए आरोपितों ने अवैध रूप से धन की मांग की।
शिकायत के आधार पर एसीबी ने मामले की जांच की और आरोपों की पुष्टि के लिए विभिन्न स्तरों पर साक्ष्य जुटाए। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर दोनों आरोपितों को मामले में आरोपी बनाया गया। इसके बाद अभियोजन की प्रक्रिया के तहत अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर की तारीख निर्धारित की है। अब अदालत में आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।
एसीबी ने कहा है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ब्यूरो का उद्देश्य सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और आम नागरिकों को बिना किसी परेशानी के सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है।
जम्मू-कश्मीर में एसीबी समय-समय पर रिश्वत और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करता रहा है। ब्यूरो को मिलने वाली शिकायतों के आधार पर जांच की जाती है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपितों के खिलाफ अदालत में मामला प्रस्तुत किया जाता है।
इस मामले में भी एसीबी ने जांच पूरी करने के बाद अदालत का रुख किया है। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से यह तय होगा कि आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोप कितने सही हैं।
भ्रष्टाचार के मामलों में राजस्व विभाग से जुड़े कर्मचारी अक्सर जांच एजेंसियों के निशाने पर रहते हैं, क्योंकि जमीन, भवन निर्माण अनुमति और अन्य प्रमाणपत्रों से जुड़े काम आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इन सेवाओं में देरी या रिश्वत की मांग से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
एसीबी ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा रिश्वत की मांग की जाती है तो इसकी जानकारी तुरंत ब्यूरो को दी जाए। शिकायतों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाती है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल बारामुला रिश्वत मामले में अदालत की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी। एसीबी द्वारा दाखिल आरोपपत्र के बाद अब न्यायालय में मामले की आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
यह मामला सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एसीबी की कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।





