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श्रीनगर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को आंध्र प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, पंजाब और तमिलनाडु के लोगों को उनके स्थापना दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। लोक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उपराज्यपाल ने कहा कि विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्थापना दिवस का आयोजन, भारत की 'विविधता में एकता' की चिरस्थायी सांस्कृतिक भावना को दर्शाता है। उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय, सद्भाव और भावनात्मक जुड़ाव की भावना को मजबूत करने तथा "एक भारत श्रेष्ठ भारत" के विजन को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
उपराज्यपाल ने कहा कि भारत की पहचान केवल भूगोल में ही नहीं, बल्कि एक साझा सांस्कृतिक चेतना में भी निहित है, जिसने सदियों से विभिन्न परंपराओं, भाषाओं, रीति-रिवाजों, ज्ञान प्रणालियों और कलात्मक अभिव्यक्तियों को एक साथ पिरोकर रखा है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों और विभिन्न क्षेत्रों की साहित्यिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध विरासत एक ऐसी अपनत्व की भावना को पोषित करती है, जो भौगोलिक सीमाओं से परे है।
उन्होंने कहा, "केरल से लेकर मध्य प्रदेश तक, और अंडमान-निकोबार से लेकर आंध्र प्रदेश तक, हमारी साहित्यिक और आध्यात्मिक विरासत हमें बताती है कि हम जीवन की एक ही धारा के अभिन्न अंग हैं। भौगोलिक दूरियां कभी भी हमारी भावनात्मक निकटता और एकता की भावना को मिटा नहीं सकतीं।"
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस मनाया जा रहा है, उनके सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र ने अपनी विशिष्ट पहचान को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय ताने-बाने को समृद्ध किया है। उन्होंने केरल की साहित्यिक और कलात्मक विरासत, साहित्य, आध्यात्मिकता और स्वतंत्रता संग्राम में आंध्र प्रदेश के योगदान, कर्नाटक की संत-कवि परंपरा, पंजाब की गहरी आध्यात्मिक विरासत और भक्ति साहित्य में हरियाणा के योगदान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के महत्व, आधुनिक शहरी नियोजन के प्रतीक के रूप में चंडीगढ़ की भूमिका, और पूरे देश की संस्कृतियों के जीवंत संगम के रूप में दिल्ली के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “भारतीय परंपराएं दिखाती हैं कि विविधता और एकता किस तरह सामंजस्यपूर्ण ढंग से एक साथ रह सकती हैं। हमारी सांस्कृतिक प्रथाएं, आस्थाएं और साहित्यिक विरासत इस विचार को पुख्ता करती हैं कि अलग-अलग क्षेत्रों के लोग साझा मूल्यों और सामूहिक राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से आपस में जुड़े हुए हैं।”
उपराज्यपाल ने कहा कि स्थापना दिवस के आयोजन एक-दूसरे की विरासत को समझने, आपसी सम्मान को मजबूत करने और लोगों के बीच गहरे संबंध विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने नागरिकों, विशेषकर युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे देश के पूर्वजों के आदर्शों से प्रेरणा लें और राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा, “हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने पूर्वजों के आदर्शों को अपनाएं, उनके दिखाए रास्ते पर चलें और राष्ट्र-निर्माण में अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाएं।” उपराज्यपाल ने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर जोर दिया और सभी नागरिकों से एक ऐसे भविष्य की दिशा में काम करने का आग्रह किया, जहां विविधता का सम्मान हो, ज्ञान और नवाचार को बढ़ावा मिले, संस्कृति और विरासत संरक्षित रहे, और हर व्यक्ति को गरिमा, अवसर तथा देश की प्रगति में सार्थक भागीदारी का भरोसा मिले।
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