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श्रीनगर, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रख्यात साहित्यकार डॉ. राही मासूम रज़ा की जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और भारतीय साहित्य तथा सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया।
गाजीपुर में आयोजित इस स्मृति कार्यक्रम के लिए भेजे गए एक संदेश में, उपराज्यपाल ने कहा कि राही साहब की रचनाओं में गाजीपुर, पूर्वांचल और पूरे भारत की आत्मा झलकती है। साथ ही, उनकी रचनाओं में मानवता और सांस्कृतिक सद्भाव पर आधारित एक व्यापक दृष्टिकोण भी देखने को मिलता है। उपराज्यपाल ने कहा कि डॉ. राही मासूम रज़ा ने 'आधा गाँव', 'टोपी शुक्ला' और 'कतरा बी आरज़ू' जैसी कृतियों, तथा 'महाभारत' के पटकथा लेखन में अपने योगदान के माध्यम से यह संदेश दिया कि भारत की संस्कृति, विरासत और भविष्य हर नागरिक का है।
आज के समय में राही मासूम रज़ा के संदेश और दृष्टिकोण की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए, उपराज्यपाल ने कहा कि देश की एकता संवैधानिक आदर्शों, साझा परंपराओं, भाईचारे, आकांक्षाओं और रोजमर्रा के अनुभवों पर टिकी है। उन्होंने नागरिकों से संवाद, सहयोग और करुणा के माध्यम से सामाजिक विश्वास को मजबूत करने और भारत की विविधता को सामूहिक शक्ति के स्रोत के रूप में देखने का आह्वान किया। उपराज्यपाल ने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के साथ-साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी विरासत के मूल्यों को अपने साथ लेकर चलना चाहिए और नवाचार, कड़ी मेहनत तथा समर्पण के जरिए अवसरों को नई संभावनाओं में बदलना चाहिए।
उन्होंने कहा, "माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत अभूतपूर्व विकास देख रहा है। बुनियादी ढांचे, डिजिटल कनेक्टिविटी, वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण, आवास, स्वच्छता और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। समावेशी विकास के लिए किए गए व्यापक प्रयासों ने आम नागरिकों की गरिमा बढ़ाई है और उनके लिए नए अवसर पैदा किए हैं।"
उपराज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने के लिए हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी और सभी क्षेत्रों का तीव्र विकास आवश्यक है, ताकि वे भारत के रूपांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। “आज भारत अंतरिक्ष से लेकर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है और दुनिया हमारे देश को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखती है। मैं चाहता हूँ कि हम एक सामूहिक संकल्प और एक ही लक्ष्य के साथ आगे बढ़ें—एक ऐसा भारत बनाने के लिए जो विकसित, समृद्ध, सशक्त, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत हो। डॉ. राही मासूम रज़ा की जन्म शताब्दी का आयोजन भविष्य को एक नई दिशा देने का अवसर है। हमारा यह संकल्प होना चाहिए कि हम अपनी विविधता को अपनी ताकत बनाएं; और संवाद, सहयोग तथा करुणा का मार्ग चुनकर हम सामाजिक विश्वास को और अधिक मजबूत करेंगे,” उपराज्यपाल ने कहा।
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