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जम्मू और कश्मीर
लेह की बैठक बेनतीजा, निर्वाचित निकाय की शक्तियों पर कायम मतभेद
nidhi
16 Oct 2026 8:37 AM IST

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लद्दाख के संवैधानिक संरक्षण पर गतिरोध
लेह: लद्दाख के लिए संवैधानिक संरक्षण और केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर निर्वाचित निकाय के गठन को लेकर गृह मंत्रालय तथा स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में सहमति नहीं बन सकी। गुरुवार, 15 अक्टूबर को लेह में हुई बातचीत के दौरान मंत्रालय ने अपना मसौदा प्रस्तुत किया, लेकिन लद्दाख के नेताओं ने इसके कई प्रावधानों पर असंतोष जताया। दोनों पक्ष अब 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में फिर बैठक करेंगे।
वार्ता में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्य मतभेद प्रस्तावित निर्वाचित निकाय के अधिकारों को लेकर हैं। स्थानीय नेताओं का कहना है कि केंद्र के प्रस्ताव और उनकी अपेक्षाओं के बीच बड़ा अंतर है। विशेष रूप से निकाय की विधायी, वित्तीय और कार्यकारी शक्तियों पर स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई है।
गृह मंत्रालय ने बैठक में लगभग 15 से 20 पन्नों का मसौदा और उसके प्रावधानों पर प्रस्तुति दी। लद्दाख के प्रतिनिधियों ने भी अपना प्रस्ताव रखा। लेह एपेक्स बॉडी के अध्यक्ष छेरिंग दोरजे लकरुक के अनुसार, दोनों दस्तावेजों में महत्वपूर्ण अंतर सामने आए। वहीं, कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सह-अध्यक्ष सज्जाद हुसैन कारगिली ने मंत्रालय के मसौदे को असंतोषजनक और अस्वीकार्य बताया। एक घंटे से अधिक चली उपसमिति की बैठक में लद्दाख प्रतिनिधियों ने गृह मंत्रालय द्वारा पहले पूछे गए सात सवालों के जवाब भी सौंपे। ये सवाल नौ सितंबर को नई दिल्ली में हुई पिछली बैठक के दौरान रखे गए थे। लकरुक ने कहा कि मतभेदों के बावजूद बातचीत जारी रहेगी और इस बैठक को वार्ता समाप्त होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
स्थानीय प्रतिनिधियों की आपत्तियों में प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा भी शामिल है। लकरुक का आरोप है कि कुछ बिंदुओं पर मंत्रालय का मौजूदा प्रस्ताव पिछली सैद्धांतिक सहमति से अलग है। उन्होंने मुख्य सचिव की वार्षिक कार्यप्रदर्शन रिपोर्ट लिखने में प्रस्तावित निर्वाचित निकाय के प्रमुख की भूमिका तथा संवैधानिक संरक्षण के तहत मिलने वाले विषयों और अधिकारों पर सवाल उठाए। बैठक के संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ था। इससे पहले 22 मई की बैठक में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने, संवैधानिक सुरक्षा देने और अधिकार संपन्न निर्वाचित निकाय बनाने पर सैद्धांतिक समझ बनी थी। अब प्रतिनिधि नए मसौदे का अध्ययन करके 18 अक्टूबर तक अपनी प्रतिक्रिया देने की तैयारी में हैं। इसके बाद 22 अक्टूबर की दिल्ली बैठक में शेष मतभेदों पर चर्चा होगी।
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