जम्मू और कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन, हाईवे पर आवाजाही ठप

Rajeshwari Nishad
14 Oct 2026 10:25 PM IST
जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन, हाईवे पर आवाजाही ठप
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जम्मू-कश्मीर। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के उड़ी क्षेत्र में भारी बारिश के बाद भूस्खलन की घटना सामने आई है। राजरवानी के पास पहाड़ का मलबा सड़क पर गिरने से राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है। सड़क पर बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और चट्टानों के टुकड़े जमा हो गए हैं, जिससे वाहनों का गुजरना मुश्किल हो गया है। प्रभावित हिस्से में पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने की जानकारी सामने आई है। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को इस मार्ग पर यात्रा करने से बचने की सलाह दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सड़क से मलबा हटाने और मार्ग को सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उड़ी क्षेत्र में बारिश के कारण पहाड़ी ढलान से मिट्टी और पत्थर नीचे आ गए। राजरवानी के समीप हुए इस भूस्खलन से सड़क का प्रभावित हिस्सा मलबे से भर गया। भारी मात्रा में मलबा जमा होने के कारण वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इस मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को यात्रा में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि भूस्खलन के बाद भी पहाड़ी से पत्थर गिरने का सिलसिला जारी है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्र से गुजरना खतरनाक हो सकता है। प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने और सड़क सुरक्षित घोषित होने तक इस हिस्से से दूर रहने की सलाह दी है।
भूस्खलन प्रभावित इलाके में लगातार पत्थर गिरने के कारण मलबा हटाने का काम भी जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे स्थानों पर सड़क से मिट्टी और चट्टानें हटाने के साथ पहाड़ी की स्थिति का आकलन करना जरूरी होता है। अगर ढलान अस्थिर बनी रहती है, तो दोबारा पत्थर गिरने का खतरा बना रह सकता है।
उड़ी और बारामूला को जोड़ने वाला मार्ग उत्तरी कश्मीर में आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है। इसके जरिए स्थानीय निवासी अपने दैनिक कामकाज, व्यापार और अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए यात्रा करते हैं। सड़क बंद होने से परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से उन लोगों को परेशानी हो सकती है, जिन्हें जरूरी काम के लिए इस मार्ग से गुजरना पड़ता है।
हालांकि, इस घटना के कारण कितने वाहन प्रभावित हुए हैं और कितनी देर से यातायात बंद है, इसकी आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है। इसी तरह किसी व्यक्ति के घायल होने या जानमाल के नुकसान की भी पुष्टि नहीं हुई है।
बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। लगातार वर्षा होने से मिट्टी में नमी बढ़ती है और ढलानों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में कमजोर चट्टानें और मिट्टी नीचे खिसकने लगती हैं। कई बार भारी पत्थर अचानक सड़क पर आ गिरते हैं, जिससे यातायात बाधित होने के साथ दुर्घटना का खतरा भी पैदा हो जाता है।
कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क परिवहन के दौरान इस तरह की प्राकृतिक चुनौतियां सामने आती रहती हैं। विशेष रूप से बारिश के मौसम में पहाड़ी मार्गों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। सड़क पर छोटे पत्थरों का गिरना भी कभी-कभी बड़े भूस्खलन का संकेत हो सकता है।
उड़ी-बारामूला मार्ग पर इस वर्ष पहले भी भूस्खलन के कारण यातायात प्रभावित हो चुका है। मई 2026 में भारी बारिश के बाद लागामा क्षेत्र में भूस्खलन से मार्ग कई घंटों तक बंद रहा था। उस समय यातायात को वैकल्पिक रास्ते से भेजना पड़ा था और मलबा हटाने के बाद आवाजाही बहाल की गई थी। यह राजरवानी की मौजूदा घटना से अलग मामला था।
भूस्खलन जैसी परिस्थितियों में प्रशासन की पहली प्राथमिकता यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है। इसी कारण प्रभावित सड़क पर वाहनों का संचालन रोकना एक महत्वपूर्ण एहतियाती कदम माना जाता है। जब तक सड़क पर गिरा मलबा पूरी तरह साफ नहीं हो जाता और पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा कम नहीं होता, तब तक यातायात बहाल करना जोखिम भरा हो सकता है।
प्रभावित मार्ग पर यात्रा करने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए। किसी भी वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने से पहले उसकी स्थिति और यातायात अनुमति की पुष्टि करना जरूरी है। वर्तमान घटना के लिए किसी विशेष वैकल्पिक मार्ग की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सड़क बहाली की प्रक्रिया में केवल मलबा हटाना ही पर्याप्त नहीं होता। सड़क की सतह, किनारों और पहाड़ी ढलान की स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण होती है। भारी पत्थर गिरने से सड़क की सतह को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा सड़क के ऊपर मौजूद अस्थिर चट्टानें आगे भी खतरा पैदा कर सकती हैं।
ऐसे में संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना होता है कि रास्ता वाहनों के संचालन के लिए सुरक्षित है। पहाड़ी क्षेत्रों में मलबा हटाने के बाद भी लगातार निगरानी की आवश्यकता पड़ सकती है, क्योंकि मौसम में बदलाव होने पर भूस्खलन की आशंका दोबारा बढ़ सकती है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे प्रभावित इलाके के पास अनावश्यक रूप से न जाएं। खासतौर पर पहाड़ी के नीचे खड़े होने, मलबे के पास पहुंचने या बंद रास्ते को पार करने की कोशिश से बचें। लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण किसी भी समय गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
इस घटना के बाद सड़क मार्ग से यात्रा की योजना बना रहे लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय प्रशासन और यातायात पुलिस से मार्ग की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेना बेहतर होगा।
फिलहाल राजरवानी के पास भूस्खलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित होने की जानकारी है। सड़क दोबारा कब खोली जाएगी, इसे लेकर कोई निश्चित समय घोषित होने की पुष्टि नहीं हुई है। मार्ग को सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही वाहनों की आवाजाही बहाल की जा सकेगी।
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