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जम्मू और कश्मीर
J&K के विकास में राज्य का दर्जा न मिलना रोक, राणा ने जताई चिंता
Ratna Netam
25 April 2026 4:53 PM IST

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Jammu.जम्मू: जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा न मिलने के कारण विकास योजनाओं और क्षेत्रीय प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ा है। यह बात वरिष्ठ राजनीतिक नेता राणा ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर को जो विशेषाधिकार और आर्थिक संसाधन मिलते थे, वे अब सीमित हो गए हैं, जिससे क्षेत्र के विकास की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
राणा ने बताया कि पहले राज्य होने के नाते जम्मू-कश्मीर को विभिन्न आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक योजनाओं में स्वतंत्रता और प्रोत्साहन मिलता था। लेकिन केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद प्रशासनिक अधिकारों में कमी और संसाधनों के वितरण में बदलाव के कारण कई योजनाओं को लागू करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों के रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
इस अवसर पर राणा ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को राज्य का दर्जा वापस मिलने से स्थानीय प्रशासन अधिक सक्रिय रूप से विकास कार्य कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह न केवल क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि युवा पीढ़ी को रोजगार और शिक्षा के बेहतर अवसर भी प्रदान करेगा।
राज्य के दर्जा न मिलने के कारण जम्मू-कश्मीर के विकास के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ठहराव आया है। राणा ने बताया कि कृषि, पर्यटन, उद्योग और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में निवेश सीमित हो गया है, क्योंकि निवेशकों को लंबे समय तक स्थायित्व की गारंटी नहीं मिल रही। इसके अलावा, स्थानीय लोगों की भागीदारी और स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित हुई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए राज्य का दर्जा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य होने पर क्षेत्र में योजनाओं के क्रियान्वयन और बजट आवंटन में तेजी आती थी, जबकि अब निर्णय लेने की प्रक्रिया केंद्रीय शासन के अधीन होने के कारण धीमी पड़ गई है।
राणा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जम्मू-कश्मीर के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि लोगों की आकांक्षाओं और क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने राणा के विचारों का समर्थन किया। उनका कहना था कि राज्य का दर्जा न मिलने के कारण स्थानीय युवाओं और किसानों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक बदलावों के बावजूद विकास योजनाओं की गति बनाए रखना बेहद जरूरी है।
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