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जम्मू और कश्मीर
Khatana ने गुज्जर-बकरवालों के पशुधन योजनाओं से वंचित रहने पर जताई चिंता
Ratna Netam
4 April 2026 4:51 PM IST

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JAMMU.जम्मू: जम्मू-कश्मीर में गुज्जर-बकरवाल समुदाय के लिए चल रही पशुपालन योजनाओं से इस समुदाय के बहिष्कार की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। इस पर सामाजिक कार्यकर्ता और प्रतिनिधि खटाना ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि गुज्जर-बकरवालों को इन योजनाओं में शामिल नहीं किया गया, तो यह समान अवसर और ग्रामीण विकास के अधिकारों का उल्लंघन होगा।
खटाना ने बताया कि गुज्जर-बकरवाल समुदाय जम्मू-कश्मीर में पशुपालन और चरवाहा जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत भेड़, बकरी और अन्य पशु हैं। लेकिन राज्य और केंद्र द्वारा शुरू की गई कई पशुपालन योजनाओं, सब्सिडी और लाभकारी कार्यक्रमों में उन्हें शामिल नहीं किया गया है। इसके परिणामस्वरूप समुदाय के आर्थिक और सामाजिक विकास में बाधा उत्पन्न हो रही है।
उन्होंने कहा कि इस तरह का बहिष्कार न केवल आर्थिक नुकसान करेगा बल्कि ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में असमानता और असंतोष भी बढ़ाएगा। खटाना ने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया कि वे समावेशी और पारदर्शी नीतियों के जरिए सुनिश्चित करें कि गुज्जर-बकरवाल समेत सभी पशुपालक समुदाय इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि गुज्जर-बकरवाल समुदाय पशुपालन के क्षेत्र में पारंपरिक अनुभव और ज्ञान रखता है, जो राज्य की कृषि और डेयरी सेक्टर के लिए भी लाभकारी है। उनके बहिष्कार से केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं होगा, बल्कि सांस्कृतिक और पारंपरिक ज्ञान का नुकसान भी होगा।
खटाना ने चेताया कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो यह सामाजिक असंतोष और विकास में असमानता पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को लक्षित सुधार और समावेशी कार्यक्रम लागू करने चाहिए, ताकि सभी पशुपालक समुदाय अपने अधिकारों और अवसरों का पूरा लाभ उठा सकें।
अधिकारियों का कहना है कि सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है और जल्द ही सभी समुदायों के लिए लाभकारी नीतियों का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। खटाना ने आश्वासन दिया कि वे समाज और सरकार के बीच संवाद बढ़ाकर गुज्जर-बकरवाल समुदाय को इस प्रक्रिया में समावेशी बनाने की कोशिश करेंगे।
कुल मिलाकर, खटाना की यह पहल यह संदेश देती है कि सभी समुदायों का विकास समान रूप से सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। पशुधन योजनाओं में समावेशी दृष्टिकोण अपनाने से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि सामाजिक न्याय और समुदायों के विश्वास को भी बढ़ावा मिलेगा।
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