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JAMMU.जम्मू: साहित्य और इतिहास प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन रहा, जब कविंदर ने अपनी नई पुस्तक ‘1967: द परमेश्वरी एजिटेशन ऑफ कश्मीर’ का विमोचन किया। इस किताब का उद्देश्य 1967 में कश्मीर में हुए सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों की विस्तृत पड़ताल करना और उनके ऐतिहासिक महत्व को आम पाठकों तक पहुँचाना है।
विमोचन समारोह में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, पत्रकारों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कविंदर ने किताब के विमोचन के समय कहा कि यह केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि कश्मीर में सामाजिक जागरूकता और नागरिक आंदोलनों की कहानी भी है। उन्होंने बताया कि इस किताब में घटनाओं का सटीक वर्णन, स्थानीय लोगों के अनुभव और प्रशासनिक प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण शामिल किया गया है।
कविंदर ने आगे कहा कि 1967 का परमेश्वरी आंदोलन केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कश्मीर की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को बचाने की कोशिश भी शामिल थी। उन्होंने यह भी बताया कि किताब में आंदोलन के प्रमुख नेताओं, नागरिक कार्यकर्ताओं और आम जनता के दृष्टिकोण को शामिल किया गया है, जिससे पाठक उस समय की परिस्थितियों और संघर्ष को समझ सकें।
समारोह में मौजूद इतिहासविद् प्रो. रश्मि शर्मा ने किताब की सराहना करते हुए कहा कि यह कश्मीर के इतिहास पर आधारित शोध और साक्ष्यों का उत्कृष्ट संग्रह है। उन्होंने कहा कि किताब से पाठकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस प्रकार स्थानीय आंदोलनों ने क्षेत्रीय राजनीति और समाज को प्रभावित किया।
पत्रकारों के सवालों के जवाब में कविंदर ने कहा कि उन्होंने किताब तैयार करते समय कई पुराने दस्तावेज़ों, सरकारी रिकॉर्ड और उस समय के स्थानीय समाचार पत्रों का अध्ययन किया। उन्होंने यह भी बताया कि किताब का उद्देश्य केवल घटनाओं का विवरण प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि पाठकों को यह दिखाना है कि किस प्रकार आम लोगों की भागीदारी और साहस किसी आंदोलन की दिशा तय कर सकता है।
विमोचन समारोह में कई साहित्यिक गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं, जिनमें पुस्तक पर चर्चा, सवाल-जवाब सत्र और कवि पाठ शामिल थे। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि किताब कश्मीर के इतिहास और सामाजिक आंदोलनों पर अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी साबित होगी।
कविंदर ने अंत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि किताब पाठकों को इतिहास से जोड़ने के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आगे भी वह ऐसे महत्वपूर्ण सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर काम जारी रखेंगे।
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