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Kathua: जीएमसी कठुआ में पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से नेफ्रोटिक सिंड्रोम का उपचार

कठुआ: सरकारी मेडिकल कॉलेज कठुआ ने बाल स्वास्थ्य सेवाओं में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जटिल नेफ्रोटिक सिंड्रोम से पीड़ित मरीज के उपचार के लिए पहली बार रिटुक्सिमैब (एडवांस बायोलॉजिकल थेरेपी) का सफल उपयोग किया है।
जीएमसी कठुआ के प्राचार्य डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री ने बताया कि बाल रोग विभाग में 14 वर्षीय एक बच्ची जो रिफ्रैक्टरी स्टेरॉयड-डिपेंडेंट नेफ्रोटिक सिंड्रोम से पीड़ित थी का सफल उपचार किया गया। यह उपचार डॉ. वीरेंद्र कुमार (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष) और डॉ. आकाश सिंह (सहायक प्रोफेसर) की देखरेख में, प्राचार्य डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री के मार्गदर्शन में किया गया। रिटुक्सिमैब एक उन्नत उपचार पद्धति है जो बीमारी से जुड़े बी-लिम्फोसाइट्स को लक्षित कर रोग की तीव्रता और बार-बार होने वाले अटैक को कम करती है, साथ ही लंबे समय तक स्टेरॉयड पर निर्भरता भी घटाती है।
खास बात यह रही कि यह उपचार मरीज को निःशुल्क उपलब्ध कराया गया। इस नई सुविधा से अब क्षेत्र के मरीजों को बाहर रेफर होने की आवश्यकता कम होगी जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। जीएमसी कठुआ प्रशासन ने इसे क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।





