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Jammu जम्मू: पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, बुनियादी ढांचे के विस्तार और केंद्र सरकार के बड़े निवेश के चलते जम्मू-कश्मीर अब पारंपरिक पर्यटन से आगे बढ़कर मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म के एक संभावित केंद्र के रूप में उभर रहा है। घाटी, जो पहले अस्थिरता और संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहती थी, अब विकास और आर्थिक बदलाव के नए अवसरों के रूप में देखी जा रही है।
सरकारी और नीतिगत स्तर पर किए गए सुधारों के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन दोनों के क्षेत्र में नई संभावनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक अस्पतालों, बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ते निवेश ने इस दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है।
इस बीच, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश में हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधे मेडिकल टूरिज्म की संभावनाओं से जोड़ते हुए इस क्षेत्र के विकास पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए, तो कश्मीर देश-विदेश के मरीजों के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य गंतव्य बन सकता है।
अधिकारियों का मानना है कि कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और जलवायु परिस्थितियां इसे वेलनेस और रिकवरी आधारित पर्यटन के लिए भी अनुकूल बनाती हैं। इसी वजह से कई निवेशक और स्वास्थ्य संस्थान यहां नई परियोजनाओं में रुचि दिखा रहे हैं।
सरकार का फोकस अब केवल पर्यटन को बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा सुविधाओं के साथ जोड़कर एक समग्र विकास मॉडल तैयार करने पर है। इसके तहत अस्पतालों के आधुनिकीकरण, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और तकनीकी सुविधाओं को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, अगर यह मॉडल सफल होता है तो यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। साथ ही, यह क्षेत्र को एक नई पहचान दिलाने में भी मदद करेगा।
फिलहाल, कश्मीर में मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म को लेकर चर्चाएं तेज हैं और सरकार इसे एक दीर्घकालिक विकास रणनीति के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।





