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Kashmir : पहली बार “ग्लोबल कश्मीरी पंडित हेरिटेज टूर एंड कॉन्क्लेव 2026” का आयोजन

Kashmir कश्मीर : कश्मीर घाटी में पहली बार “ग्लोबल कश्मीरी पंडित हेरिटेज टूर एंड कॉन्क्लेव 2026” का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम 6 जून से 14 जून तक चलेगा और इसका उद्देश्य कश्मीरी पंडित समुदाय की सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।
इस आयोजन के तहत मुख्य दो दिवसीय सम्मेलन 13 और 14 जून को श्रीनगर में स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान देश-विदेश से आए प्रतिनिधि, समुदाय के सदस्य, विद्वान और सामाजिक संगठन भाग लेंगे।
Global Kashmiri Pandit Heritage Tour and Conclave 2026 को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम कश्मीरी पंडितों की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को उनके इतिहास से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
Srinagar में होने वाला यह सम्मेलन सांस्कृतिक संवाद, प्रदर्शनी, विचार-विमर्श सत्रों और हेरिटेज टूर जैसी गतिविधियों पर आधारित होगा। इसमें कश्मीर की ऐतिहासिक परंपराओं, कला, भाषा और सामाजिक योगदान पर भी चर्चा की जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न देशों में रह रहे कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इससे यह आयोजन एक वैश्विक सांस्कृतिक मिलन का रूप ले सकता है। आयोजकों का कहना है कि इस पहल से समुदाय की जड़ों को मजबूत करने और आपसी संवाद को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
Sher-e-Kashmir International Convention Centre को इस दो दिवसीय मुख्य सम्मेलन के लिए विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है, जहां विभिन्न सत्रों और प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें इतिहासकार, शोधकर्ता और सांस्कृतिक विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।
इस आयोजन को लेकर स्थानीय प्रशासन ने भी सहयोग का आश्वासन दिया है ताकि कार्यक्रम सुचारू और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित एजेंसियों ने प्रारंभिक तैयारी शुरू कर दी है।
आयोजकों का मानना है कि यह कॉन्क्लेव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच होगा जो समुदाय की ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस आयोजन को लेकर कश्मीरी पंडित समुदाय में उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद कश्मीर में इस स्तर का अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।





