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Kashmir : ओलावृष्टि से सेब के बागों को भारी नुकसान, बागवानी सेक्टर पर बढ़ी चिंता

Kashmir कश्मीर : कश्मीर घाटी में इस साल सेब के बागों को फल लगने के महत्वपूर्ण समय के दौरान बार-बार हुई ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। इससे पूरे क्षेत्र में सेब उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है और बागवानों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं।
दक्षिण कश्मीर के शोपियां और पुलवामा जैसे प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों से लेकर उत्तर कश्मीर के कुछ हिस्सों तक पिछले दो महीनों में लगातार ओले गिरने और तेज़ हवाओं ने फसलों को प्रभावित किया है। इस कारण छोटे फल झड़ गए हैं, पत्तियों को नुकसान पहुंचा है और बागों की समग्र सेहत पर असर पड़ा है।
कश्मीर भारत का सबसे बड़ा सेब उत्पादक क्षेत्र माना जाता है, लेकिन इस बार मौसम की मार के कारण बंपर उत्पादन की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं। किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने न केवल मौजूदा फसल को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि आने वाले सीजन की संभावनाओं को भी प्रभावित किया है।
यह स्थिति ऐसे समय में और गंभीर हो गई है जब कश्मीर का बागवानी सेक्टर पहले से ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। बाजार में ईरान, तुर्की, अमेरिका और न्यूजीलैंड जैसे देशों से आने वाले सेबों की बढ़ती आपूर्ति ने स्थानीय बागवानों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन बना दी है।
बागवानों का कहना है कि मौसम से हुए नुकसान के कारण उनकी लागत बढ़ गई है, जबकि उत्पादन घटने से आय पर सीधा असर पड़ेगा। कई किसानों ने चिंता जताई है कि यदि इसी तरह की मौसमीय घटनाएं जारी रहीं तो पूरे सेक्टर पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते मौसम पैटर्न और अचानक होने वाली ओलावृष्टि कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे में फसलों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों और बीमा योजनाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, कश्मीर के सेब बागानों को हुए इस नुकसान ने राज्य के बागवानी सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है और किसानों के सामने आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।





