जम्मू और कश्मीर

AICC एससी सेल में नई जिम्मेदारी, करण भगत को मिला पद

Ratna Netam
25 April 2026 4:59 PM IST
AICC एससी सेल में नई जिम्मेदारी, करण भगत को मिला पद
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Jammu.जम्मू: धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा जम्मू में बगलामुखी जयंती का आयोजन बड़े उत्साह और भक्ति भाव के साथ किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। समारोह का उद्देश्य न केवल माता बगलामुखी की पूजा और उपासना करना था, बल्कि समाज में धर्म और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना भी था।
धर्मार्थ ट्रस्ट के आयोजकों ने बताया कि जयंती कार्यक्रम में विशेष पूजा, हवन और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर को फूलों और रंगोली से सजाया गया था, जिससे वातावरण धार्मिक और भक्तिपूर्ण हो गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने माता बगलामुखी के महात्म्य का गुणगान किया और उनके आशीर्वाद के लिए प्रार्थना की।
कार्यक्रम में ट्रस्ट के सदस्यों ने बताया कि बगलामुखी माता को शक्ति, भय निवारण और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा देने वाली देवी माना जाता है। इसलिए भक्त इस अवसर पर माता के समक्ष विशेष पूजा और भेंट अर्पित करते हैं। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने मंत्र जाप और हवन कर देवी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास किया।
धर्मार्थ ट्रस्ट ने इस जयंती के दौरान गरीब और जरूरतमंदों के लिए भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए। उन्होंने भोजन और आवश्यक सामग्री का वितरण किया, जिससे यह धार्मिक अवसर सामाजिक सेवा का भी प्रतीक बन गया। ट्रस्ट के अध्यक्ष ने कहा कि धर्म और समाज सेवा साथ-साथ चलना चाहिए और इसी संदेश के तहत इस जयंती का आयोजन किया गया।
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समुदाय में धार्मिक और सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। बच्चों और युवाओं ने भी भाग लिया, जिससे यह कार्यक्रम भविष्य में संस्कृति और परंपराओं के प्रति उनकी जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा।
धर्मार्थ ट्रस्ट ने बताया कि बगलामुखी जयंती को मनाने का उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं, बल्कि समाज में एकता और सकारात्मकता फैलाना भी है। कार्यक्रम के दौरान सभी ने यह संकल्प लिया कि वे समाज में नैतिक और धार्मिक मूल्यों को बनाए रखेंगे और जरूरतमंदों की मदद करेंगे।
जम्मू में आयोजित इस जयंती ने धार्मिक उत्साह और सामाजिक जिम्मेदारी का एक सुंदर मिश्रण प्रस्तुत किया। ट्रस्ट ने यह भी घोषणा की कि आगामी वर्षों में भी इस तरह के आयोजनों को निरंतर जारी रखा जाएगा, ताकि समाज में धर्म और सेवा की भावना बनी रहे।
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