जम्मू और कश्मीर

JKAACL का लोक कला उत्सव, संगीत, नृत्य और संस्कृति का जश्न

Ratna Netam
3 May 2026 6:23 PM IST
JKAACL का लोक कला उत्सव, संगीत, नृत्य और संस्कृति का जश्न
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Jammu.जम्मू: जम्मू-कश्मीर आर्ट एंड कल्चर लॉजिस्टिक्स (जेकेएएसीएल) ने हाल ही में लोक कला और संगीत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘सुर साज़ ते संगत: दुग्गर मालती’ नामक एक विशेष लोक उत्सव का आयोजन किया। यह कार्यक्रम जम्मू के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न आयु और पृष्ठभूमि के कलाकारों ने भाग लिया।
इस उत्सव का उद्देश्य स्थानीय लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक धरोहर को आम जनता तक पहुँचाना था। कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को मनोरंजन और सांस्कृतिक ज्ञान दोनों प्रदान किया।
जेकेएएसीएल के अध्यक्ष ने उद्घाटन समारोह में कहा कि इस तरह के लोक उत्सवों का आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और युवा पीढ़ी के बीच लोक कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि ‘सुर साज़ ते संगत: दुग्गर मालती’ जैसी पहल न केवल कलाकारों को मंच देती है, बल्कि दर्शकों को भी स्थानीय कला और संगीत के विविध रंगों से रूबरू कराती है।
कार्यक्रम में पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे सारंगी, ढोलक और बनसुरी की मधुर धुनों ने माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने स्थानीय गीतों और कथाओं को प्रस्तुत किया, जिससे दर्शक अपनी संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ सके।
दर्शकों ने कार्यक्रम की भव्यता और कलाकारों की प्रस्तुति की प्रशंसा की। कई ने कहा कि इस तरह के लोक उत्सव समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में मदद करते हैं।
जेकेएएसीएल ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में ऐसे और भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें जम्मू-कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को उजागर किया जाएगा। इसके तहत स्थानीय कलाकारों को प्रशिक्षण, मंच और प्रचार के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे।
इस उत्सव ने न केवल कला और संगीत के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए एक सांस्कृतिक मिलन स्थल भी बना। लोगों ने इसे एक ऐसा अवसर बताया जो उन्हें अपनी संस्कृति को जीवित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने में मदद करता है।
‘सुर साज़ ते संगत: दुग्गर मालती’ कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि जम्मू-कश्मीर की लोक कला और संगीत आज भी अपनी जीवंतता बनाए हुए है और समाज में इसे बढ़ावा देने के प्रयास निरंतर जारी हैं।
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