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J&K : निवेश के लिए नया ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कानून प्रस्तावित

Jammu जम्मू: जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास और निवेश को गति देने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) शैलेन्द्र कुमार ने शुक्रवार को जानकारी दी कि मौजूदा सिंगल विंडो सिस्टम के साथ-साथ सरकार एक समर्पित ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम लाने पर काम कर रही है।
इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राज्य में निवेशकों और उद्यमियों के लिए कारोबारी माहौल को आसान बनाना है। इसके तहत विभिन्न विभागों से मिलने वाली अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल और तेज किया जाएगा, ताकि निवेश से जुड़ी औपचारिकताओं में होने वाली देरी को कम किया जा सके।
Shailendra Kumar ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास के लिए दीर्घकालिक और टिकाऊ दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाना जरूरी है।
सरकार का मानना है कि प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद निवेशकों को विभिन्न विभागों से मंजूरी प्राप्त करने में आसानी होगी और एक ही ढांचे के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी हो सकेंगी। इससे राज्य में उद्योगों की स्थापना और विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान सिंगल विंडो सिस्टम के बावजूद कई स्तरों पर मंजूरी लेने में समय लगता है, जिससे निवेश प्रक्रिया प्रभावित होती है। नए कानून के जरिए इन बाधाओं को कम करने की योजना है।
प्रस्तावित ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी विभाग समयबद्ध तरीके से अपनी स्वीकृति प्रदान करें और प्रक्रियागत जटिलताओं को न्यूनतम किया जाए। इससे छोटे और बड़े दोनों प्रकार के उद्यमियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बेहतर नीति और सरल नियमों के माध्यम से राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून प्रभावी ढंग से लागू होता है तो यह जम्मू-कश्मीर को निवेश के लिए अधिक आकर्षक गंतव्य बना सकता है और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई दिशा दे सकता है।
फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है और संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श जारी है। आने वाले समय में इस अधिनियम को लेकर विस्तृत रूपरेखा सार्वजनिक की जा सकती है।





