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J&K : विवादित पुस्तक पर जांच तेज, ओबराय बुक्स सर्विस के कार्यालय में छापेमारी

Jammu जम्मू : जम्मू और कश्मीर में सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरियों तक पहुंची विवादित पुस्तक “पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जेएंडके” को लेकर जांच एजेंसियों ने सख्ती बढ़ा दी है। इस पुस्तक में कथित तौर पर आतंकियों और अलगाववादी नेताओं को “महान हस्तियां” और “लेजेंड” के रूप में प्रस्तुत किए जाने के आरोप हैं, जिसके बाद मामला गंभीर जांच के दायरे में आ गया है।
इस पूरे प्रकरण में शनिवार देर रात सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए प्रकाशक के ठिकाने पर छापेमारी की। पुलिस, काउंटर इंटेलिजेंस (CI), प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने ओबराय बुक्स सर्विस के बाहू प्लाजा स्थित कार्यालय पर दबिश दी।
छापेमारी के दौरान टीम ने कार्यालय में मौजूद कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा को अपने कब्जे में लिया। अधिकारियों ने पूरे सिस्टम की जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पुस्तक का प्रकाशन किस प्रक्रिया के तहत किया गया और इसमें शामिल सामग्री को किस स्तर पर अनुमोदन मिला था।
इसके साथ ही जांच टीम ने प्रकाशक के गोदाम में भी तलाशी अभियान चलाया, जहां से कई अन्य पुस्तकों की प्रतियां बरामद की गईं। इन पुस्तकों को भी जांच के लिए कब्जे में लिया गया है ताकि उनकी सामग्री और प्रकाशन प्रक्रिया की विस्तृत जांच की जा सके।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विवादित पुस्तक को सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरियों तक कैसे पहुंचाया गया और क्या इसके वितरण में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है। शिक्षा विभाग की भूमिका और मंजूरी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए अपनी आंतरिक जांच शुरू कर दी है। विभाग यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रहा है कि क्या पुस्तक को शामिल करने से पहले सभी आवश्यक मानकों और अनुमोदन प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
काउंटर इंटेलिजेंस की टीम भी इस मामले में तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही या जानबूझकर की गई गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस विवादित पुस्तक को लेकर स्थानीय स्तर पर भी बहस तेज हो गई है। कई शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने पुस्तक की सामग्री पर आपत्ति जताई है और इसे शिक्षा प्रणाली में शामिल किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शैक्षणिक सामग्री में ऐतिहासिक और सामाजिक तथ्यों की प्रस्तुति संतुलित और प्रमाणिक होनी चाहिए।
वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल पुस्तक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी पूरी प्रकाशन और वितरण व्यवस्था की जांच की जा रही है। इसके तहत यह भी देखा जा रहा है कि क्या अन्य स्कूलों में भी ऐसी पुस्तकें पहुंची हैं या नहीं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले में डिजिटल रिकॉर्ड और प्रकाशन दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए सभी कंप्यूटर सिस्टम और फाइलों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा सकता है।
बाहू प्लाजा क्षेत्र में हुई इस छापेमारी के बाद प्रकाशन जगत में भी हलचल देखी जा रही है। कई अन्य प्रकाशकों ने भी अपने रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू कर दी है ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई से बचा जा सके।
कुल मिलाकर, यह मामला अब केवल एक पुस्तक के विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, प्रकाशन प्रक्रिया और सामग्री अनुमोदन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेंगे।





