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Jammu.जम्मू: जम्मू में डीएसएस (डिपार्टमेंट ऑफ सोशल सर्विसेज/स्पोर्ट्स/स्कूल एजुकेशन—संबंधित विभाग) द्वारा डुग्गर मेले का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और लोककला की शानदार झलक देखने को मिली। इस आयोजन का उद्देश्य डुग्गर क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना रहा।
मेले का उद्घाटन संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम स्थल को पारंपरिक डोगरी सजावट से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण सांस्कृतिक रंगों में रंग गया। मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और विभिन्न स्टॉलों व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
मेले में लोक संगीत, लोक नृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और हस्तशिल्प प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। स्थानीय कलाकारों ने डोगरी गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। खासकर युवाओं ने पारंपरिक कला प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे कार्यक्रम में उत्साह और बढ़ गया।
आयोजकों ने बताया कि डुग्गर मेला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित और प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस तरह के आयोजन युवाओं को अपनी परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मेले में विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए, जिनमें स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, कृषि उत्पादों और स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी गई। इससे लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी भी आसानी से मिल सकी।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों और युवाओं के लिए भी विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें चित्रकला, लोकगीत प्रतियोगिता और सांस्कृतिक क्विज शामिल रहे। विजेताओं को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।
डीएसएस के अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन आगे भी नियमित रूप से किए जाएंगे ताकि डोगरी संस्कृति को और अधिक मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में पारंपरिक संस्कृति को बचाना बेहद जरूरी है, और ऐसे मेले इस दिशा में एक मजबूत कदम हैं।
स्थानीय लोगों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि डुग्गर मेला न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह समाज को एकजुट करने और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने का भी माध्यम है।
कुल मिलाकर, डुग्गर मेला जम्मू में सांस्कृतिक उत्सव का एक शानदार उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने लोगों को अपनी परंपराओं और विरासत से फिर से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।
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