जम्मू और कश्मीर

Jammu: सज्जाद गनी लोन नजरबंद, पुण्यतिथि कार्यक्रम में शामिल होने से रोका गया

Kavita2
21 May 2026 11:12 AM IST
Jammu: सज्जाद गनी लोन नजरबंद, पुण्यतिथि कार्यक्रम में शामिल होने से रोका गया
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Jammu जम्मू: जम्मू-कश्मीर में पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष Sajad Gani Lone को उनके पिता की 24वीं पुण्यतिथि के अवसर पर कथित तौर पर नजरबंद कर दिया गया है। पार्टी ने गुरुवार को यह दावा करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।

पार्टी के अनुसार, सज्जाद गनी लोन को उनके पिता शहीद अब्दुल गनी लोन की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने के लिए उनके आवास पर नजरबंद रखा गया। अब्दुल गनी लोन की 21 मई 2002 को आतंकवादियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय हुई थी जब वे मीरवाइज़ मौलवी मोहम्मद फारूक को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक हुर्रियत कॉन्फ्रेंस रैली से बाहर निकल रहे थे।

पीपल्स कॉन्फ्रेंस ने अपने बयान में इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों और स्मरण कार्यक्रमों में भाग लेने की स्वतंत्रता पर सवाल उठाता है। पार्टी का कहना है कि शहीदों की पुण्यतिथि जैसे अवसर पर परिवार को श्रद्धांजलि देने से रोकना उचित नहीं है।

बयान में कहा गया, “जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस, शहीद अब्दुल गनी लोन की पुण्यतिथि पर अपने अध्यक्ष और हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद गनी लोन को नजरबंद किए जाने की कड़ी निंदा करती है।” पार्टी ने प्रशासन से इस फैसले को वापस लेने और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान करने की अपील की है।

अब्दुल गनी लोन जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा रहे हैं और उनकी हत्या को राज्य के राजनीतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटना माना जाता है। उनकी पुण्यतिथि पर हर साल समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

पार्टी का कहना है कि सज्जाद गनी लोन अपने पिता की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना चाहते थे, लेकिन उन्हें उनके आवास पर ही रोक दिया गया, जिससे समर्थकों में नाराजगी फैल गई है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस कथित नजरबंदी को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए किसी भी संभावित भीड़ या प्रदर्शन को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों ने इसे राजनीतिक गतिविधियों पर रोक और मौलिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही जा रही है

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