जम्मू और कश्मीर

Jammu: महिलाओं के अधिकारों के लिए पूर्णिमा ने कांग्रेस को चेताया

Ratna Netam
26 April 2026 6:25 PM IST
Jammu: महिलाओं के अधिकारों के लिए पूर्णिमा ने कांग्रेस को चेताया
x
Jammu.जम्मू: जम्मू में सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता पूर्णिमा ने कांग्रेस पार्टी को चेतावनी दी है कि यदि पार्टी आरक्षण बिल को रोकती है, तो उन्हें महिलाओं के गुस्से और विरोध का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकार और समान अवसर सुनिश्चित करना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
पूर्णिमा ने कहा कि आरक्षण बिल महिलाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अवसरों को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसे लागू नहीं किया गया, तो यह समाज में लैंगिक असमानता को और बढ़ावा देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं का गुस्सा और विरोध केवल राजनीतिक दबाव बनाकर ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता को बढ़ाने के लिए भी होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी को यह समझना चाहिए कि महिलाओं के मुद्दों पर संवेदनशील रहना और उनके अधिकारों की रक्षा करना न केवल नैतिक जिम्मेदारी है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी आवश्यक है। पूर्णिमा ने यह अपील की कि सभी राजनीतिक दल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर काम करें और उनके विरोध को अनदेखा न करें।
स्थानीय नागरिकों और महिलाओं ने इस बयान का समर्थन किया। कई महिलाओं ने कहा कि आरक्षण बिल रोकने से उन्हें शिक्षा और नौकरी में समान अवसर नहीं मिल पाएंगे। एक महिला कार्यकर्ता ने कहा, “हमारे अधिकारों की अनदेखी करने वाले नेताओं के खिलाफ हम आवाज उठाएंगे और आरक्षण के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।”
विशेषज्ञों का कहना है कि आरक्षण बिल जैसे कानून महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये बिल न केवल रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देते हैं।
पूर्णिमा ने कांग्रेस पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि अगर पार्टी ने समय पर आरक्षण बिल पास नहीं किया, तो यह राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाओं का विरोध बढ़ सकता है और इससे कांग्रेस की छवि प्रभावित होगी।
जम्मू में यह बयान राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। महिलाओं के अधिकारों और आरक्षण बिल के महत्व पर यह बहस स्थानीय मीडिया और सामाजिक मंचों पर जोर पकड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मुद्दे पर जल्द ही ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है, ताकि महिलाओं के हितों की रक्षा की जा सके और सामाजिक संतुलन बनाए रखा जा सके।
Next Story