जम्मू और कश्मीर

जम्मू : महाराजा प्रताप सिंह ने 117 साल पहले इसे ब्रिटिश इंजीनियरों की मदद से किया तैयार

Shiddhant Shriwas
11 Aug 2022 3:20 PM IST
जम्मू : महाराजा प्रताप सिंह ने 117 साल पहले इसे ब्रिटिश इंजीनियरों की मदद से किया तैयार
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महाराजा प्रताप सिंह ने 117 साल पहले इसे ब्रिटिश इंजीनियर

जम्मू, राज्य ब्यूरो : दक्षिण एशिया में सबसे पुराना है और बनावट में विश्वभर में अद्वितीय जम्मू-कश्मीर की पहली पनबिजली परियोजना 'मोहरा' में फिर से बिजली उत्पादन होगा। जिला बारामूला के बोनयार के मोहरा गांव में महाराजा प्रताप सिंह ने 117 साल पहले इसे ब्रिटिश इंजीनियरों की मदद से तैयार करवाया था। बाढ़ से क्षतिग्रस्त होकर 25 सालों से भी अधिक समय से ठप पड़े इस परियोजना को हेरिटेज प्रोजेक्ट के तौर पर फिर से पुनर्जीवित किया जा रहा है।

जम्मू कश्मीर ऊर्जा विकास निगम ने कश्मीर के बारामूला के बोनयार में 133.50 करोड़ रूपये की लागत से 10.5 मैगावाट की 'मोहरा' हेरीटेज पनबिजली परियोजन के निमार्ण को मंजूरी दे दी है।
यह फैसला श्रीनगर सचिवालय में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्यसचिव विवेक भारद्धाज की अध्यक्षता में हुई निगम के निदेशक मंडल की 81वीं बैठक में लिया गया। 'मोहरा' प्रोजेक्ट एशिया का दूसरा पनबिजली प्रोजेक्ट है। इसका निमार्ण वर्ष 1905 में हुआ था। झेलम नदी पर इस प्रोजेक्ट की क्षमता 4 मैगावाट थी। इसे बढ़ाकर 9 मैगावाट किया गया था।
अब यह प्रोजेक्ट बंद पड़ा हुआ है। उपराज्यपाल प्रशासन की पूरी कोशिश थी कि 117 साल पुराने इस प्रोजेक्ट को फिर से सुचारू बनाया जाए। ऐसे में इस दिशा में कदम उठाते हुए निदेशक मंडल ने इस प्रोजेक्ट काे बनाने की मंजूरी दे दी। इस प्रोजेक्ट को 42 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।


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