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जम्मू-कश्मीर ने लागू की CBG नीति 2026, जैविक कचरे से बनेगा स्वच्छ ईंधन

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने जैविक कचरे का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद तैयार करने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) नीति 2026 अधिसूचित कर दी है। सरकार के मुताबिक यह नीति कचरा प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण रोजगार और टिकाऊ कृषि को एक साथ बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है। नई नीति के तहत CBG संयंत्र स्थापित करने वाले निवेशकों को पूंजीगत सहायता के साथ कई वित्तीय और प्रशासनिक प्रोत्साहन दिए जाएंगे।
नीति को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद अधिसूचित किया गया है। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में ऑर्गेनिक वेस्ट को बेकार सामग्री के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलने के लिए एक अनुकूल निवेश माहौल तैयार करना है। नीति के तहत तैयार होने वाला कंप्रेस्ड बायो-गैस परिवहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि संयंत्रों से निकलने वाले जैविक पदार्थ को जैविक खाद के रूप में उपयोग करने की योजना है।
कई तरह के जैविक कचरे का होगा इस्तेमाल
नई नीति में CBG उत्पादन के लिए जैविक कचरे के कई स्रोतों को शामिल किया गया है। इनमें पशुओं का गोबर, सेब से निकलने वाला कचरा यानी एप्पल पोमेस, नगर निकायों का ठोस कचरा, चीड़ की सूखी पत्तियां और फसल अवशेष शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इन संसाधनों को वैज्ञानिक तरीके से उपयोग में लाकर कचरा प्रबंधन की समस्या को कम किया जाए और साथ ही स्वच्छ ईंधन का उत्पादन बढ़ाया जाए।
जम्मू-कश्मीर में कृषि, बागवानी और पशुपालन से जुड़े जैविक अवशेष बड़ी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। एप्पल पोमेस और फसल अवशेष जैसे पदार्थों को CBG संयंत्रों के लिए फीडस्टॉक के रूप में इस्तेमाल करने से इनका वैकल्पिक उपयोग संभव होगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन से निकलने वाले गोबर को भी ऊर्जा उत्पादन और जैविक खाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
प्रति TPD 50 लाख रुपये तक की पूंजी सहायता
नीति का सबसे महत्वपूर्ण प्रोत्साहन पूंजीगत व्यय सहायता है। पात्र CBG परियोजनाओं को प्रति टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता पर 0.50 करोड़ रुपये यानी 50 लाख रुपये की सहायता देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि एक परियोजना के लिए इस सहायता की अधिकतम सीमा 10 करोड़ रुपये तय की गई है।
सरकार की ओर से यह सहायता CBG क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है। संयंत्र लगाने में भूमि, मशीनरी, प्रसंस्करण और अन्य बुनियादी ढांचे पर बड़ी शुरुआती लागत आती है। ऐसे में पूंजीगत सहायता निवेशकों की शुरुआती वित्तीय जरूरत को कम करने में मदद कर सकती है।
एक रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर सरकारी जमीन
नीति के तहत सरकार CBG परियोजनाओं के लिए सरकारी भूमि को महज एक रुपये प्रति वर्ग मीटर की नाममात्र लीज दर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करेगी। भूमि की लागत कम होने से परियोजनाओं की शुरुआती लागत को कम करने में मदद मिल सकती है और निवेशकों के लिए संयंत्र स्थापित करना आसान हो सकता है।
इसके साथ ही परियोजनाओं को स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान भी दिया गया है। इससे जमीन और परियोजना से जुड़े कुछ लेनदेन की लागत कम हो सकती है।
मंजूरियों के लिए 60 दिन की व्यवस्था
नई नीति में कारोबारी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी प्रावधान किए गए हैं। गैर-वैधानिक अनुमतियों के लिए सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से 60 दिन की deemed approval व्यवस्था लागू की जाएगी। इसका मतलब है कि पात्र आवेदन निर्धारित समय में निपटाए नहीं जाने पर संबंधित अनुमति को नीति के नियमों के तहत स्वीकृत माना जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य परियोजनाओं को अनावश्यक प्रशासनिक देरी से बचाना और निवेशकों के लिए कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को सरल बनाना है। हालांकि वैधानिक और अनिवार्य अनुमतियों के लिए संबंधित कानूनों और नियमों का पालन जारी रहेगा।
पहले पांच साल 100 प्रतिशत SGST प्रतिपूर्ति
नीति में टैक्स प्रोत्साहन का भी प्रावधान है। पात्र परियोजनाओं के संचालन के पहले पांच वर्षों के लिए 100 प्रतिशत SGST reimbursement की व्यवस्था की गई है। इससे परियोजना संचालकों की परिचालन लागत और निवेश की आर्थिक व्यवहार्यता पर असर पड़ सकता है।
सरकार का उद्देश्य ऐसी नीतिगत सहायता के जरिए निजी क्षेत्र को CBG संयंत्र लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके साथ कम लीज दर और पूंजीगत सहायता मिलने से परियोजना की कुल लागत संरचना को भी राहत मिल सकती है।
स्थानीय रोजगार को बढ़ावा
CBG नीति में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी शामिल किया गया है। नीति के तहत स्थानीय अकुशल श्रमिकों के लिए प्रति व्यक्ति 3,000 रुपये प्रति माह की मैनपावर सब्सिडी, अधिकतम दो वर्षों तक, देने का प्रावधान है।
सरकार ने वर्ष 2030 तक करीब 2,000 प्रत्यक्ष ग्रामीण रोजगार पैदा होने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा CBG की पूरी वैल्यू चेन में अप्रत्यक्ष आजीविका के अवसर बनने की संभावना भी जताई गई है। इसमें कच्चे जैविक कचरे का संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और जैविक खाद के वितरण जैसे काम शामिल हो सकते हैं।
किसानों तक पहुंचेगी जैविक खाद
नीति में CBG संयंत्रों से तैयार होने वाली जैविक खाद के लिए बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। सरकार फीडस्टॉक के संग्रहण और बायो-मैन्योर के लिए मार्केट लिंकages की सुविधा देने की बात कह रही है। इसके तहत लगभग 10,000 किसानों तक जैविक खाद पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसका उद्देश्य CBG उत्पादन को केवल ईंधन तक सीमित न रखते हुए कृषि क्षेत्र से भी जोड़ना है। संयंत्रों में जैविक कचरे के प्रसंस्करण के बाद उपलब्ध उप-उत्पादों का इस्तेमाल जैविक खाद के रूप में किया जा सकेगा। इससे किसानों के लिए वैकल्पिक खाद संसाधन विकसित करने की कोशिश होगी।
बैंक ऋण पर ब्याज में राहत
निवेशकों के लिए नीति में बैंक टर्म लोन पर 2 करोड़ रुपये तक की interest subvention का प्रावधान भी किया गया है। इससे संयंत्र स्थापित करने वाली परियोजनाओं पर ऋण की वित्तीय लागत कम करने में सहायता मिल सकती है।
पूंजीगत सहायता, सस्ती सरकारी जमीन, SGST reimbursement और ब्याज सब्सिडी जैसे कई प्रोत्साहन एक साथ दिए जाने से सरकार CBG क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
कचरे से ऊर्जा और आय का मॉडल
CBG नीति का व्यापक उद्देश्य जैविक कचरे को आर्थिक संसाधन में बदलना है। अभी जिन पदार्थों को कचरे या अपशिष्ट के रूप में देखा जाता है, उनका इस्तेमाल ऊर्जा और जैविक खाद के उत्पादन में किया जा सकता है। इससे एक circular economy मॉडल को बढ़ावा देने की कोशिश होगी, जिसमें कचरे का दोबारा उपयोग कर उससे नए आर्थिक संसाधन तैयार किए जाएं।
नीति के जरिए सरकार विकेंद्रीकृत waste-to-energy परियोजनाओं को बढ़ावा देना चाहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर कचरे का संग्रह और प्रसंस्करण होने से परिवहन लागत कम करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावना भी बन सकती है।
नीति 2032 तक प्रभावी रहेगी
जम्मू-कश्मीर CBG नीति 2026 2032 तक प्रभावी रहने वाली है। इस अवधि में सरकार का लक्ष्य CBG क्षेत्र में निवेश के लिए स्थायी नीतिगत ढांचा तैयार करना और हरित परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नीति को स्वच्छ ऊर्जा और circular economy को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सरकार के अनुसार, इससे कचरा प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर सरकार की नई CBG नीति में एक तरफ जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद तैयार करने की व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ निवेशकों के लिए वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रोत्साहन दिए गए हैं। प्रति TPD 50 लाख रुपये की पूंजी सहायता, 10 करोड़ रुपये तक की अधिकतम परियोजना सहायता, एक रुपये प्रति वर्ग मीटर पर सरकारी जमीन, 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट, पांच साल की SGST प्रतिपूर्ति और बैंक ऋण पर ब्याज सहायता जैसे प्रावधानों के जरिए सरकार इस क्षेत्र में नए निवेश को आकर्षित करना चाहती है।





