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जम्मू और कश्मीर
Jammu: हाईकोर्ट ने गंभीर गैंग रेप मामले में ज़मानत नहीं दी
Ratna Netam
25 April 2026 4:50 PM IST

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Jammu.जम्मू: जम्मू हाईकोर्ट ने एक गंभीर गैंग रेप मामले में आरोपी को ज़मानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह फैसला मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुनाया। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी को अस्थायी राहत देना उचित नहीं है, क्योंकि यह समाज और कानून के दृष्टिकोण से गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बताया कि आरोपी पर आरोप गंभीर हैं और उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत भी मौजूद हैं। अभियोजन ने अदालत को बताया कि अगर आरोपी को ज़मानत दी गई, तो पीड़िता और अन्य गवाहों को खतरा हो सकता है। अदालत ने इस बात को ध्यान में रखते हुए ज़मानत देने से साफ़ मना कर दिया।
जम्मू हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि समाज में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसे मामलों में न्यायिक संस्थाओं का कर्तव्य है कि वे न केवल पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करें, बल्कि ऐसे अपराधों को रोकने का स्पष्ट संदेश भी दें। अदालत ने जोर देकर कहा कि ज़मानत देने का निर्णय केवल आरोपी की व्यक्तिगत परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि मामले की गंभीरता और समाज पर प्रभाव को देखते हुए लिया जाना चाहिए।
वकीलों ने बताया कि आरोपी ने हाईकोर्ट से यह याचिका दायर की थी कि उसे न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अस्थायी राहत दी जाए। लेकिन अदालत ने कहा कि गंभीर अपराधों में इस प्रकार की राहत पीड़िता और समाज के हितों के खिलाफ हो सकती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी की ज़मानत केवल अत्यधिक विशेष परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए।
अधिकारियों का कहना है कि अदालत का यह फैसला अन्य गंभीर अपराध मामलों में भी समान दृष्टिकोण को स्थापित करता है। इससे स्पष्ट होता है कि जम्मू हाईकोर्ट महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में सख्त रुख अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फैसले से न केवल पीड़िता को न्याय मिलेगा, बल्कि समाज में अपराधियों के लिए चेतावनी भी जाएगी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का यह रुख समाज में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। अदालत ने पुलिस की जांच को मान्यता दी और कहा कि जांच पूरी होने तक आरोपी को हिरासत में रखना ही उचित है। पुलिस ने भी अदालत के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि यह कदम न्याय की प्रक्रिया को मजबूत करेगा।
जम्मू हाईकोर्ट का यह फैसला गैंग रेप और यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। इससे यह संदेश जाता है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में कोई भी अपराधी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अस्थायी राहत का लाभ नहीं उठा सकता।
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