जम्मू और कश्मीर

Jammu: सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम संपन्न

Admindelhi1
17 Jun 2026 11:34 AM IST
Jammu: सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम संपन्न
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सीएसआईआर-आईआईआईएम में कैंसर जागरूकता को लेकर विशेष पहल

जम्मू: सीएसआईआर–इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (आईआईआईएम), जम्मू ने जम्मू-कश्मीर स्टेट चैप्टर ऑफ एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया (एएसआई) के सहयोग से नेशनल सर्जन्स डे एवं सर्जन्स वीक के उपलक्ष्य में स्तन कैंसर स्क्रीनिंग और ब्रेस्ट सेल्फ-अवेयरनेस विषय पर एक विशेष जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया।

कार्यक्रम में सर्जनों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य स्तन कैंसर की रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जम्मू के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. संजय भसीन ने किया। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में सर्जनों की बदलती भूमिका तथा चिकित्सकों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि सर्जन्स वीक के अंतर्गत चलाए जा रहे अभियान का उद्देश्य केवल रोगियों की देखभाल तक सीमित नहीं है बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों के स्वास्थ्य और कल्याण को भी बढ़ावा देना है।

मुख्य वक्ता एवं जीएमसी जम्मू के सर्जरी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रजनी भारद्वाज ने स्तन कैंसर स्क्रीनिंग और ब्रेस्ट सेल्फ-अवेयरनेस पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि स्तन कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में से एक है और इसकी समय पर पहचान उपचार की सफलता और जीवित रहने की संभावना को काफी बढ़ा देती है। डॉ. भारद्वाज ने बताया कि बदलती जीवनशैली, शहरीकरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति लापरवाही स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले सामान्य और असामान्य परिवर्तनों के प्रति जागरूक रहने तथा नियमित रूप से ब्रेस्ट सेल्फ-अवेयरनेस का अभ्यास करने की सलाह दी।

उन्होंने प्रतिभागियों को स्तन कैंसर के शुरुआती संकेतों जैसे असामान्य गांठ, त्वचा में बदलाव या अन्य लक्षणों की पहचान करने और समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लेने के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही आवश्यकता अनुसार क्लीनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन और मैमोग्राफी जांच के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने जीवनशैली, पर्यावरणीय प्रभाव और बदलती खानपान की आदतों का कैंसर के बढ़ते मामलों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चर्चा की और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच कराने का आह्वान किया।

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