- Home
- /
- राज्य
- /
- जम्मू और कश्मीर
- /
- Jammu : स्मार्ट सिटी...
Jammu : स्मार्ट सिटी मिशन के आठ साल बाद भी श्रीनगर में चुनौतियां बरकरार

श्रीनगर : कश्मीर में पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच श्रीनगर शहर में बुनियादी सुविधाओं और शहरी प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत आधुनिक और सुविधाजनक शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन मिशन में शामिल होने के करीब आठ साल बाद भी शहर कई पुरानी समस्याओं से जूझ रहा है।
बार-बार आने वाली बाढ़, ट्रैफिक जाम, अधूरे नागरिक कार्य और धीमी गति से चल रही परियोजनाओं ने स्मार्ट सिटी योजना की प्रगति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते पर्यटन दबाव के बीच श्रीनगर को बेहतर शहरी व्यवस्था की जरूरत पहले से कहीं अधिक है।
श्रीनगर को साल 2017 में स्मार्ट सिटीज मिशन के तीसरे चरण के तहत शामिल किया गया था। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को करीब 3,634 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य शहर को आधुनिक तकनीक से लैस, बेहतर परिवहन व्यवस्था वाला और नागरिक सुविधाओं से भरपूर बनाना था।
योजना के तहत श्रीनगर में बेहतर मोबिलिटी, मजबूत ड्रेनेज सिस्टम, विरासत स्थलों का संरक्षण, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और आधुनिक सार्वजनिक स्थान विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया था। सरकार का उद्देश्य था कि शहर को एक ऐसे मॉडल शहरी क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए, जहां लोगों को बेहतर जीवन सुविधाएं मिल सकें।
हालांकि, समय बीतने के साथ कई परियोजनाओं की रफ्तार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शहर में मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ की समस्या अब भी बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट सिटी योजना का एक प्रमुख उद्देश्य जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना था, लेकिन कई इलाकों में बारिश के बाद स्थिति सामान्य होने में लंबा समय लग जाता है।
इसके अलावा श्रीनगर में ट्रैफिक जाम भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। कई प्रमुख इलाकों में रोजाना जाम की स्थिति देखने को मिलती है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को परेशानी होती है।
शहर में चल रहे लंबे समय से जारी निर्माण कार्यों ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। कई जगहों पर सड़क निर्माण, सौंदर्यीकरण और अन्य नागरिक परियोजनाओं के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि काम जल्द पूरा होने चाहिए ताकि सामान्य जनजीवन प्रभावित न हो।
पर्यटन क्षेत्र के लिहाज से श्रीनगर कश्मीर का प्रमुख केंद्र है। हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की आधारभूत सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ शहरी ढांचे को भी मजबूत करना जरूरी है।
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत श्रीनगर में कई डिजिटल और आधुनिक सुविधाएं शुरू करने की योजना बनाई गई थी। इनमें स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं शामिल थीं। लेकिन इन योजनाओं का पूरा लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी संचालन और रखरखाव की जरूरत है।
अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कई परियोजनाओं पर काम किया गया है और शहर में बदलाव दिखाई दे रहे हैं। उनका दावा है कि आधुनिक सुविधाओं के विस्तार, सार्वजनिक स्थानों के विकास और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
वहीं, आलोचकों का कहना है कि केवल नई परियोजनाएं शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समय पर पूरा होना और लंबे समय तक प्रभावी रहना भी जरूरी है। उनका मानना है कि श्रीनगर जैसे संवेदनशील शहर के लिए बाढ़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कश्मीर में पर्यटन के बढ़ते विस्तार को देखते हुए श्रीनगर के सामने अब चुनौती और बड़ी हो गई है। शहर को स्मार्ट बनाने का लक्ष्य तभी पूरा माना जाएगा, जब स्थानीय निवासियों और पर्यटकों दोनों को बेहतर सुविधाएं मिलें।
फिलहाल, स्मार्ट सिटी मिशन के आठ साल बाद भी श्रीनगर में विकास और चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत बनी हुई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लंबित परियोजनाएं कितनी तेजी से पूरी होती हैं और शहर की पुरानी समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाता है।





