जम्मू और कश्मीर

Jammu: आतंकी साजिश मामले में देविंदर सिंह की जमानत याचिका खारिज

Payal
14 April 2026 3:55 PM IST
Jammu: आतंकी साजिश मामले में देविंदर सिंह की जमानत याचिका खारिज
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Jammu.जम्मू: जम्मू में आतंकी साजिश से जुड़े एक संवेदनशील मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी Devinder Singh की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। अदालत ने यह फैसला मामले की गंभीरता, जांच की वर्तमान स्थिति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सुनाया।
सूत्रों के अनुसार, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया और दलील दी कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक आतंकी नेटवर्क और कथित साजिश से जुड़ा हुआ है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि जांच अभी शुरुआती और महत्वपूर्ण चरण में है, ऐसे में आरोपी को जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है और महत्वपूर्ण साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और वह जांच में सहयोग कर रहा है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जमानत देना उसका कानूनी अधिकार है और उसे बिना ठोस आधार के हिरासत में रखना उचित नहीं है। हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार करने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और इसमें कई पहलुओं की जांच अभी जारी है। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया के हित में यह आवश्यक है कि जांच बिना किसी बाधा के पूरी हो। अदालत ने यह भी माना कि यदि आरोपी को इस स्तर पर जमानत दी जाती है तो जांच प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला आतंकी साजिश और उससे जुड़े नेटवर्क की गतिविधियों से संबंधित है, जिसमें विभिन्न स्तरों पर जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों ने अदालत के फैसले को महत्वपूर्ण बताया है, क्योंकि इससे जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी होती है ताकि सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके और दोषियों की सही भूमिका स्पष्ट हो सके।
इस मामले ने क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सतर्क कर दिया है। जांच टीम अब मामले से जुड़े अन्य संभावित लिंक और संपर्कों की भी जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस कथित साजिश में किन-किन लोगों की भूमिका रही हो सकती है।
फिलहाल, अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। बचाव पक्ष के पास उच्च न्यायालय में अपील करने का विकल्प मौजूद है, जबकि जांच एजेंसियां अपने स्तर पर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई हैं।
कुल मिलाकर, यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मामलों में से एक माना जा रहा है, जिसमें अदालत का यह निर्णय जांच प्रक्रिया की गंभीरता और निष्पक्षता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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