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Jammu: सांसारिक मोह-माया पर हुआ विस्तृत विचार-विमर्श

जम्मू: साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने आज राँजड़ी में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में अपने आध्यात्मिक प्रवचनों की अमृतवर्षा से संगत को निहाल किया। उन्होंने कहा कि सभी संत महापुरुषों, धर्मग्रंथों और योगी-योगेश्वरों ने एक स्वर में यही कहा है कि यह संसार स्वप्नवत और मायाबी है। अपने प्रवचन में सद्गुरु जी ने भगवान विष्णु और एक भक्त की कथा का उल्लेख करते हुए माया के स्वरूप को समझाया। उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु ने भक्त को नदी में डुबकी लगाने के लिए कहा और पल भर में उसने एक पूरा जीवन जी लिया जंगल में भटकना, विवाह करना, संतान होना, राजा बनना और अंततः आत्महत्या तक की घटनाएँ उसे वास्तविक प्रतीत हुईं। बाहर आने पर भगवान विष्णु ने उसे समझाया कि यही माया है जो क्षणभर में अनगिनत अनुभवों का आभास करा देती है।
सद्गुरु जी ने कहा कि मनुष्य जानता है कि संसार नश्वर है और एक दिन सब कुछ छोड़कर जाना है फिर भी उसमें मोह और आकर्षण बना रहता है। उन्होंने इसे माया का प्रभाव बताते हुए कहा कि जैसे कोई व्यक्ति हानिकारक वस्तु को जानते हुए भी उसे छोड़ नहीं पाता वैसे ही मनुष्य संसारिक मोह में बंधा रहता है। उन्होंने आगे कहा कि यह शरीर भी मायाबी और नाशवान है किंतु इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसी मानव तन के माध्यम से मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए मनुष्य को विषय-विकारों में जीवन न गंवाकर सत्य नाम का स्मरण और भक्ति-भजन करना चाहिए। सद्गुरु मधुपरमहंस जी महाराज के प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। संगत ने सत्संग के दौरान गहन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ आध्यात्मिक संदेशों का श्रवण किया।





