जम्मू और कश्मीर

तबाही के बाद फिर सक्रिय जैश का ठिकाना बहावलपुर में दोबारा तैयार हुआ हेडक्वार्टर

Ratna Netam
23 Aug 2026 6:18 PM IST
तबाही के बाद फिर सक्रिय जैश का ठिकाना बहावलपुर में दोबारा तैयार हुआ हेडक्वार्टर
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नई दिल्ली। आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित ठिकाने को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तबाह किए गए इस आतंकी संगठन के प्रमुख ठिकाने को दोबारा तैयार किए जाने की कोशिशें की जा रही हैं। दावा किया जा रहा है कि इस काम के लिए पाकिस्तान की ओर से बड़ी आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई है।
बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद का यह परिसर लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में रहा है। इसे संगठन की गतिविधियों, प्रशिक्षण और आतंकी नेटवर्क के संचालन से जुड़े प्रमुख केंद्रों में से एक माना जाता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय कार्रवाई में इस ठिकाने को बड़ा नुकसान पहुंचा था।
ऑपरेशन सिंदूर में बना था निशाना
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने आतंकी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई थी।
बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के परिसर को भी इसी कार्रवाई में नुकसान पहुंचने की खबरें आई थीं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आतंकी संगठनों के बुनियादी ढांचे को कमजोर करना आतंकवाद के खिलाफ रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दोबारा निर्माण को लेकर उठे सवाल
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बहावलपुर स्थित इस परिसर के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी गई है। इसमें करीब 25 करोड़ रुपये की मदद मिलने की बात कही जा रही है।
इस मामले को लेकर भारत की सुरक्षा एजेंसियां और विशेषज्ञ लगातार नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि आतंकी संगठनों के ढांचे को फिर से खड़ा करने की कोशिशें क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं।
जैश-ए-मोहम्मद का इतिहास
जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना वर्ष 2000 में मसूद अजहर ने की थी। यह संगठन कई बड़े आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार माना गया है। भारत में हुए कई हमलों में इस संगठन का नाम सामने आया है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, संगठन लंबे समय से युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने और आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करता रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी निगरानी
आतंकी संगठनों के ठिकानों पर नजर रखना भारत समेत कई देशों की सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता रही है। खुफिया एजेंसियां लगातार ऐसे नेटवर्क, आर्थिक स्रोतों और गतिविधियों की जानकारी जुटाने में लगी रहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आतंकी संगठन को कमजोर करने के लिए केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं बल्कि उसकी आर्थिक मदद, भर्ती प्रक्रिया और प्रचार तंत्र पर भी प्रभावी रोक लगाना जरूरी है।
भारत की नीति
भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए।
बहावलपुर स्थित जैश के ठिकाने को लेकर सामने आई खबरों के बाद एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि किसी भी दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक होती है और ऐसे मामलों में आधिकारिक बयानों का महत्व रहता है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही हैं और आतंकी नेटवर्क से जुड़ी हर गतिविधि की निगरानी की जा रही है।
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