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कश्मीर में समय से पहले सेब गिरने पर जांच तेज, ‘सुपर एम-45’ के बैच पर उठे सवाल

श्रीनगर। कश्मीर के सेब उत्पादकों के लिए इस साल बागानों से आई असामान्य खबर ने चिंता बढ़ा दी है। शोपियां जिले के जैनापोरा समेत कई इलाकों और अनंतनाग के कुछ हिस्सों में बड़ी संख्या में सेब समय से पहले पेड़ों से गिरने के मामले में सरकार ने जांच तेज कर दी है। कृषि उत्पादन मंत्री जावेद अहमद डार ने विधानसभा में बताया कि मामले की जांच वैज्ञानिक, नियामकीय और पुलिस स्तर पर की जा रही है।
यह जानकारी विधायक शौकत हुसैन गनई द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में दी गई। मंत्री ने कहा कि समय से पहले फलों के गिरने से प्रभावित बागवानों को आर्थिक नुकसान हुआ है और सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है।
सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए बागवानी कश्मीर के निदेशक और जम्मू-कश्मीर के विधि प्रवर्तन निदेशक को शामिल करते हुए एक संयुक्त जांच समिति बनाई है। समिति ने 21 सितंबर को अपनी स्थिति रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी, जबकि विस्तृत अंतिम रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
जांच का अहम हिस्सा प्रभावित बागानों का वैज्ञानिक निरीक्षण है। शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की बहु-विषयक टीमों ने 18 जून, 29 जून और 3 जुलाई को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान 37 गांवों के 61 किसानों और बागानों का सर्वे किया गया।
जांच में सभी 61 बागानों में समय से पहले फल गिरने की समस्या दर्ज की गई। इनमें से 20 बागवानों ने ‘सुपर एम-45’ नाम से बिकने वाले फफूंदनाशी का अकेले उपयोग किया था, जबकि 41 ने इसे अन्य कृषि रसायनों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया था।
मंत्री ने विधानसभा में बताया कि कुछ बागानों में नुकसान की स्थिति लगातार गंभीर होती गई। प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान कई जगह लगभग 30 प्रतिशत फल गिरने की स्थिति सामने आई थी। दूसरे दौरे तक कुछ स्थानों पर यह आंकड़ा करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि तीसरे निरीक्षण में कुछ बागानों में लगभग 90 प्रतिशत तक फल गिरने की स्थिति दर्ज की गई।
मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब बाजार में बिक रहे ‘सुपर एम-45’ के एक विशेष बैच संख्या SP-1902 की जांच शुरू हुई। कृषि विभाग की प्रवर्तन शाखा ने इस बैच की बिक्री और वितरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की।
जांच में इस बैच से जुड़े 12 लाइसेंसधारी विक्रेताओं की पहचान की गई। शोपियां जिले में संबंधित बैच के करीब 238 किलोग्राम उत्पाद को जब्त किया गया।
प्रारंभिक जांच में बैच की पहचान और नियामकीय विवरण को लेकर कई विसंगतियां मिलने की बात सामने आई। इनमें QR कोड, पंजीकरण संख्या, निर्माण लाइसेंस, स्वीकृत लेबल, निर्माण तिथि और सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस से जुड़े विवरण शामिल हैं।
मंत्री ने बताया कि पैकेट पर छपा QR कोड कथित रूप से किसी दूसरी पंजीकृत इकाई से संबंधित पाया गया। इसके अलावा निर्माण लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों के विवरण में भी अंतर सामने आया।
इन तथ्यों के सामने आने के बाद मामले में केवल कृषि विभाग की जांच तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी गई। कथित गलत ब्रांडिंग और अन्य विसंगतियों को लेकर कीटनाशक अधिनियम 1968 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।
इसके अलावा उत्पाद के वास्तविक निर्माता, पैकेजिंग, आपूर्ति श्रृंखला और जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए मामला पुलिस को भी सौंपा गया। इस संबंध में 23 सितंबर 2026 को शोपियां पुलिस स्टेशन में FIR संख्या 0200 दर्ज की गई।
पुलिस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित बैच वास्तव में कहां तैयार हुआ, इसकी पैकेजिंग किसने की और यह बाजार तक किस रास्ते से पहुंचा। जांच का उद्देश्य यह भी तय करना है कि यदि उत्पाद में किसी प्रकार की अनियमितता हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।
समय से पहले सेब गिरने की शिकायतें जून से ही सामने आने लगी थीं। शोपियां के कई बागवानों ने दावा किया था कि कुछ कृषि रसायनों के इस्तेमाल के बाद उनके बागों में बड़ी संख्या में फल गिरने लगे। इसके बाद प्रशासन ने नमूने जांच के लिए भेजे और प्रभावित इलाकों का सर्वे शुरू किया।
सरकार ने जून में ही प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने और नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए थे। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को ऐसे उत्पादों की बिक्री पर निगरानी बढ़ाने और घटिया या अनधिकृत कीटनाशकों तथा फफूंदनाशियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था।
बागवानों के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कश्मीर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सेब उत्पादन बड़ी भूमिका निभाता है। शोपियां विशेष रूप से सेब उत्पादन के लिए जाना जाता है और यहां बड़ी संख्या में परिवार सीधे बागवानी पर निर्भर हैं।
समय से पहले फलों का गिरना केवल उत्पादन घटने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर किसानों की सालभर की आय, मंडियों में आपूर्ति और बागानों की आगामी देखभाल पर भी पड़ता है।
प्रभावित किसानों ने शुरुआती दिनों से ही विस्तृत जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की थी। कुछ बागवानों ने कार्रवाई में देरी को लेकर नाराजगी भी जताई थी।
हालांकि सरकार ने साफ किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी एक उत्पाद या कंपनी को अंतिम रूप से नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वैज्ञानिक जांच, प्रयोगशाला परीक्षण और पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक कारण और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।
फिलहाल संयुक्त जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। सरकार के अनुसार जांच पूरी होने के बाद नुकसान के कारणों, संबंधित उत्पाद की वैधता और जिम्मेदार लोगों पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
कश्मीर के बागवानों की नजर अब इस जांच के निष्कर्ष पर है। यदि ‘सुपर एम-45’ के संबंधित बैच में गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो इससे कृषि रसायनों की बिक्री, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
सरकार का कहना है कि मामले को वैज्ञानिक और कानूनी दोनों स्तर पर देखा जा रहा है ताकि प्रभावित किसानों को वास्तविक कारणों की जानकारी मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।





