जम्मू और कश्मीर

धार्मिक सत्संग में Swami Ram Swarup ने बताया ईश्वर की एकत्व की महत्ता

Ratna Netam
25 April 2026 5:02 PM IST
धार्मिक सत्संग में Swami Ram Swarup ने बताया ईश्वर की एकत्व की महत्ता
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Jammu.जम्मू: प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु स्वामी राम स्वरूप ने हाल ही में आयोजित धार्मिक सत्संग में ईश्वर की एकता और वैदिक शिक्षाओं पर गहन प्रकाश डाला। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं और धर्मनिरपेक्ष नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। स्वामी ने अपने व्याख्यान में बताया कि वैदिक दर्शन और शास्त्रों के अनुसार, सभी जीव और ब्रह्मांड का मूल स्रोत एक ही ईश्वर है, और यही ज्ञान मानव जीवन को सच्चे अर्थों में समृद्ध करता है।
स्वामी राम स्वरूप ने कहा कि आज के समय में समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक भिन्नताओं के कारण कई बार भ्रम और असंतोष फैलता है। उन्होंने वैदिक शिक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि चाहे धर्म कोई भी हो, सभी का उद्देश्य मानव कल्याण और ईश्वर की भक्ति है। उन्होंने कहा, “ईश्वर की एकता को समझना ही सच्ची आध्यात्मिक उन्नति की शुरुआत है। यह ज्ञान मनुष्य को अहंकार, द्वेष और मतभेद से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है।”
कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि वैदिक ग्रंथों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी प्राणी और तत्व ईश्वर की विविध अभिव्यक्तियां हैं। इसी दृष्टि से, हर व्यक्ति और प्राणी में समान आदर और करुणा का भाव रखना चाहिए। उन्होंने समाज में भाईचारे, नैतिक मूल्यों और सहिष्णुता के महत्व पर भी जोर दिया।
स्वामी राम स्वरूप ने आगे कहा कि आध्यात्मिक अभ्यास और धार्मिक अनुशासन केवल मंदिर या पूजा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह समाज और मानवता के कल्याण के लिए भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर की एकता को समझने से व्यक्ति अपने व्यक्तिगत जीवन में मानसिक शांति और संतुलन पा सकता है और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने स्वामी के उपदेशों को बेहद प्रभावशाली और प्रेरणादायक बताया। कई लोगों ने कहा कि उन्होंने वैदिक शिक्षाओं के माध्यम से जीवन में एक नई दृष्टि प्राप्त की है और अब वे अपने कार्य और व्यवहार में अधिक संयम और करुणा लाने का प्रयास करेंगे।
धार्मिक विद्वानों ने भी स्वामी राम स्वरूप के व्याख्यान की सराहना की। उनका कहना था कि ऐसे सत्संग समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने और धार्मिक सहिष्णुता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्वामी राम स्वरूप ने अंत में सभी को यह संदेश दिया कि ईश्वर की एकता को समझना और उसका अनुभव करना मानव जीवन की सर्वोच्च उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में नैतिकता, आध्यात्मिकता और मानवता के मूल्य बनाए रखें।
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