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जम्मू और कश्मीर
जम्मू में बेमौसम मौसम का असर, खेतों में बिछी धान की फसल
nidhi
11 Oct 2026 8:14 AM IST

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सांबा में किसानों की बढ़ी चिंता
रामगढ़ : जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में मौसम की मार ने धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की कटाई का समय नजदीक आने के बीच खेतों में खड़ी फसल बिछ गई है। इससे किसानों के सामने फसल को सुरक्षित रखने और समय पर कटाई पूरी करने की चुनौती खड़ी हो गई है। किसानों के लिए यह स्थिति इसलिए भी मुश्किल है, क्योंकि फसल को नुकसान पहुंचने से उनकी मेहनत और खेती पर किया गया खर्च प्रभावित हो सकता है।
धान की फसल तैयार होने के दौरान मौसम में होने वाला बदलाव किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। सांबा जिले में खेतों में बिछी फसल को देखकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। कटाई से पहले फसल का जमीन पर गिर जाना खेती के काम को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में किसानों को अब फसल की स्थिति पर नजर रखने और कटाई की तैयारी करने की जरूरत है।
कटाई से पहले फसल बिछने से बढ़ी परेशानी
धान की खेती में फसल तैयार होने के बाद कटाई सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक होती है। इस दौरान खेतों में खड़ी फसल को सुरक्षित तरीके से काटकर उसकी उपज को नुकसान से बचाना जरूरी होता है। लेकिन सांबा में कटाई से पहले धान की फसल खेतों में बिछ जाने से किसानों के सामने मुश्किलें बढ़ गई हैं।
फसल जमीन पर गिरने से कटाई के काम में परेशानी आ सकती है। सामान्य तौर पर खड़ी फसल की तुलना में बिछी हुई फसल को काटना अधिक कठिन हो सकता है। इससे किसानों को कटाई के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। मौसम की स्थिति और खेतों में फसल की हालत को देखते हुए कटाई का काम प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। किसानों के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दौरान वे पूरे सीजन की मेहनत के बाद तैयार हुई उपज को घर लाने की तैयारी करते हैं। ऐसे में फसल का बिछ जाना उनकी चिंता बढ़ा रहा है।
पराली को लेकर भी किसानों की चिंता
धान की फसल पर मौसम की मार का असर केवल अनाज तक सीमित नहीं है। फसल कटने के बाद खेतों में बचने वाली पराली को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ सकती है। खेतों में फसल बिछ जाने से कटाई और उसके बाद फसल अवशेषों को संभालने में परेशानी हो सकती है।
पराली कृषि गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसान इसे विभिन्न कृषि कार्यों में उपयोग करने या निर्धारित तरीके से निपटाने की व्यवस्था करते हैं। लेकिन यदि मौसम के कारण खेतों में फसल की स्थिति बिगड़ती है, तो पराली को सुरक्षित रखने और उसका प्रबंधन करने में भी कठिनाई आ सकती है। सांबा के किसानों के सामने अब फसल की कटाई के साथ-साथ पराली को संभावित नुकसान से बचाने की चुनौती भी है। यदि मौसम की स्थिति अनुकूल नहीं रहती है, तो खेतों में पड़े फसल अवशेषों को संभालना और मुश्किल हो सकता है। हालांकि, पराली को हुए वास्तविक नुकसान की मात्रा को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं दिया गया है।
मौसम की दोहरी मार से बढ़ी चिंता
किसानों के लिए खेती केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं होती। बीज, खाद, सिंचाई और खेतों में काम करने पर खर्च करने के बाद उन्हें कटाई के समय उपज सुरक्षित मिलने की उम्मीद रहती है। ऐसे में फसल तैयार होने के ठीक पहले मौसम की मार पड़ने से उनकी चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
सांबा जिले में धान की फसल बिछने की स्थिति ने किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर उन्हें तैयार फसल की कटाई करनी है, वहीं दूसरी ओर पराली के संभावित नुकसान को लेकर भी चिंता बनी हुई है। किसानों के लिए अब खेतों की स्थिति और मौसम के अनुसार आगे की तैयारी करना महत्वपूर्ण हो गया है। फसल को जमीन पर गिरने से कटाई की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, यदि खेतों में नमी बढ़ती है या मौसम लगातार प्रतिकूल बना रहता है, तो फसल को संभालने में और कठिनाई आ सकती है। हालांकि, आगे मौसम कैसा रहेगा और फसल को कितना नुकसान हुआ है, इस संबंध में किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए विस्तृत जानकारी जरूरी है।
किसानों के लिए आगे की चुनौती
धान की कटाई से पहले फसल का बिछना कृषि कार्यों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में खेतों में फसल की वास्तविक स्थिति का आकलन करना और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार कटाई की योजना बनाना जरूरी है। किसानों को यह भी देखना होगा कि फसल को किस तरह सुरक्षित तरीके से काटा जा सकता है और पराली को संभालने के लिए क्या व्यवस्था की जा सकती है। फिलहाल सांबा जिले के किसानों के सामने मौसम की मार से प्रभावित धान की फसल को संभालने की चुनौती है। कटाई से पहले खेतों में बिछी फसल और पराली को लेकर बढ़ती चिंता ने खेती के इस महत्वपूर्ण दौर को मुश्किल बना दिया है। किसानों की नजर अब मौसम की स्थिति और फसल को सुरक्षित निकालने की संभावनाओं पर टिकी है।
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