जम्मू और कश्मीर

जम्मू की रिहायशी बस्तियों में अवैध डेयरियां बनीं चुनौती, रोज निकल रहा 40 से 50 टन गोबर

Kavita2
18 Sept 2026 4:59 PM IST
जम्मू की रिहायशी बस्तियों में अवैध डेयरियां बनीं चुनौती, रोज निकल रहा 40 से 50 टन गोबर
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जम्मू। मंदिरों के शहर जम्मू में रिहायशी इलाकों के बीच नियमों को दरकिनार कर संचालित हो रहीं डेयरियां अब नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देशों के बावजूद कई डेयरी संचालक अपने स्तर पर गोबर और अन्य अपशिष्ट का उचित निस्तारण नहीं कर रहे हैं।

जम्मू नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, शहर की सीमा के भीतर बड़ी संख्या में डेयरियां संचालित हो रही हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर का पंजीकरण तक नहीं हुआ है। निगम क्षेत्र में कुल 345 डेयरियां चल रही हैं, जबकि नगर निगम के रिकॉर्ड में केवल 108 डेयरियां ही पंजीकृत हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, शहर में संचालित करीब 237 डेयरियां बिना वैध पंजीकरण के चल रही हैं। इन डेयरियों से निकलने वाला कचरा और गोबर शहर की सफाई व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।

नगर निगम के अनुसार, इन डेयरियों से प्रतिदिन लगभग 40 से 50 टन गोबर निकलता है। उचित प्रबंधन नहीं होने के कारण यह कचरा कई जगहों पर खुले में फेंका जाता है, जिससे गंदगी फैलने के साथ-साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।

नियमों के पालन में कमी

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के तहत कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना जरूरी है। इसके अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी डेयरी संचालन और अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इसके बावजूद कई डेयरी संचालक इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। नगर निगम की चिंता यह है कि रिहायशी इलाकों में चल रही डेयरियों से निकलने वाला गोबर नालियों और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच रहा है।

इससे न केवल शहर की स्वच्छता प्रभावित हो रही है, बल्कि दुर्गंध, मच्छर और अन्य समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

निगम के सामने बड़ी चुनौती

जम्मू नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बिना पंजीकरण वाली डेयरियों की पहचान और उन पर नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। शहर के बीचों-बीच चल रही डेयरियों के कारण सफाई व्यवस्था को बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।

नगर निगम समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में अवैध डेयरियां होने के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरियों से निकलने वाले गोबर का सही प्रबंधन किया जाए तो यह कचरा नहीं बल्कि उपयोगी संसाधन बन सकता है। गोबर से खाद और अन्य जैविक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिससे पर्यावरण को भी लाभ मिल सकता है।

शहर की स्वच्छता पर असर

जम्मू जैसे तेजी से बढ़ते शहर में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी है। रिहायशी इलाकों में संचालित डेयरियों से निकलने वाले अपशिष्ट का उचित प्रबंधन नहीं होने पर इसका सीधा असर आसपास रहने वाले लोगों पर पड़ता है।

स्थानीय लोगों की शिकायत रहती है कि कई क्षेत्रों में डेयरियों के कारण गंदगी और दुर्गंध की समस्या बनी रहती है। बारिश के समय स्थिति और खराब हो जाती है, जब गोबर और गंदा पानी सड़कों व नालियों में फैल जाता है।

पंजीकरण और निगरानी पर जोर

नगर निगम की ओर से डेयरी संचालकों को पंजीकरण कराने और अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन करने के लिए कहा जाता रहा है। अधिकारियों का मानना है कि सभी डेयरियों का रिकॉर्ड तैयार होने से निगरानी और व्यवस्था बेहतर हो सकती है।

इसके अलावा डेयरी संचालकों को गोबर निस्तारण के लिए उचित व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए जाते हैं।

फिलहाल जम्मू में अवैध डेयरियों का मुद्दा स्वच्छता और पर्यावरण के लिहाज से गंभीर चुनौती बना हुआ है। नगर निगम के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि बड़ी संख्या में डेयरियां अभी भी नियमों के दायरे से बाहर हैं।

अब देखना होगा कि नगर निगम इस समस्या के समाधान के लिए आगे क्या कदम उठाता है और क्या सभी डेयरियों को पंजीकरण व अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत लाया जा सकेगा।

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