जम्मू और कश्मीर

घाटी और जम्मू में लोगों के बीच भारी रोष, विभिन्न संगठनों ने टारगेट किलिंग के खिलाफ किया प्रदर्शन

Ritisha Jaiswal
1 Jun 2022 4:53 PM IST
घाटी और जम्मू में लोगों के बीच भारी रोष,  विभिन्न संगठनों ने टारगेट किलिंग के खिलाफ किया प्रदर्शन
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कुलगाम में महिला शिक्षक रजनी बाला की हत्या के बाद से घाटी और जम्मू में लोगों के बीच भारी रोष है। बुधवार को जम्मू में विभिन्न संगठनों ने टारगेट किलिंग के खिलाफ प्रदर्शन किया।

कुलगाम में महिला शिक्षक रजनी बाला की हत्या के बाद से घाटी और जम्मू में लोगों के बीच भारी रोष है। बुधवार को जम्मू में विभिन्न संगठनों ने टारगेट किलिंग के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं, घाटी में कश्मीरी पंडितों ने सरकार को मंगलवार को ठोस फैसला लेने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, जो आज पूरा होना है।

बुधवार को जम्मू शहर में भाजपा कश्मीर विस्थापित सेल ने पाकिस्तान और आतंकवाद का पुतला जला कर प्रदर्शन किया। विस्थापित सेल के अध्यक्ष चांद भट ने कहा कि कुलगाम में शिक्षिका रजनी बाला की हत्या की वे कड़ी निंदा करते हैं और सरकार से मांग करते हैं कि रजनी बाला को इंसाफ दिया चाहिए। रजनी के कातिलों का जल्द से जल्द खात्मा किया जाना चाहिए। चांद भट ने कहा कि कश्मीर में जो भी अल्पसंख्यक कर्मचारी कार्यरत है उन्हें उचित सुरक्षा दी जानी चाहिए।
वहीं, शिवसेना डोगरा फ्रंट ने आतंकवाद के खिलाफ जम्मू में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने गुपकार गठबंधन को गुपकार गैंग करार देते हुए उनके खिलाफ नारेबाजी की। फ्रंट के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि कश्मीर में लगातार टारगेट किलिंग हो रही है। जनवरी से मई महीने तक 16 निर्दोष लोगों की हत्या की गई। साथ ही पांच महीने में 90 से करीब आतंकियों को खात्मा कर दिया गया है। लेकिन, टारगेट किलिंग नहीं रुक रही हैं। सरकार को चाहिए कि आतंक के खिलाफ ठोस नीति अपनाई जाए।
उन्होंने कहा कि रजनी बाला बच्चों को शिक्षा दे रही थी। क्या बच्चों को शिक्षा देना गलत है। उन्होंने कहा कि अमरीन भट तो एक कलाकार थी। रंजीत सिंह, राहुल भट कितने नाम लिए जाएं। यह हत्याएं कब रुकेंगी। साथ ही गुपकार गठबंधन की सोच को पाकिस्तानी बताया और उनकी गिरफ्तारी की मांग की।
उधर, कश्मीर में मंगलवार को जम्मू-श्रीनगर हाईवे को अनंतनाग के वेसू इलाके में बंद किया। बटवारा में भी रास्ता जाम किया गया। इंदिरानगर में भी पंडित समुदाय के लोग सड़क पर उतरे तथा आवाज बुलंद की।कश्मीरी पंडितों का कहना था कि अगर 24 घंटे में सरकार ने कोई ठोस फैसला नहीं लिया तो वे घाटी से सामूहिक पलायन करेंगे। वहीं, घाटी में डोगरा व अन्य अल्पसंख्यक कर्मचारियों ने भी मंगलवार को सरकार के विरोध में अपनी नाराजगी जताई है और सुरक्षा दिए जाने या सुरक्षित स्थानों पर ट्रांसफर किए जाने की मांग की है।


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